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आज का पंचांग 3 जुलाई 2026

By Janhit TV

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~*आज का पञ्चाङ्ग* ~
*दिनांक – 03 जुलाई 2026*
*दिन – शुक्रवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
*शक संवत -1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – उत्तरायण*
*ऋतु – ग्रीष्म ॠतु*
*मास – आषाढ (गुजरात-महाराष्ट्र ज्येष्ठ)*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – तृतीया सुबह 11:20 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
*नक्षत्र – श्रवण सुबह 11:46 तक तत्पश्चात धनिष्ठा*
*योग – विष्कंभ शाम 05:00 तक तत्पश्चात प्रीति*
*राहुकाल – सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 तक*
*सूर्योदय – 05:14*
*सूर्यास्त – 06:46*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे*
व्रत पर्व विवरण- संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय:रात्रि 09:47),पंचक (आरंभ: मध्यरात्रि 12:48)
विशेष- तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34
*नकसीर*
यह होने पर सिर पर ठंडा पानी डालें | ताज़ी व कोमल दूब ( दूर्वा ) का रस अथवा हरे धनिये का रस बूँद – बूँद नाक में टपकाने से रक्त निकलना बंद हो जाता है | दिन में दो – तीन बार १० ग्राम आँवले के रस में मिश्री मिलाकर पिलायें अथवा गन्ने का ताजा रस पिलाने से नकसीर में पूरा आराम मिलता है l
*बेहोश होने पर( Coma से बाहर लाने )*
कोई बेहोश हो गया हो तो उसके सिर पर तिल के तेल की मालिश करो, पैरों पर तिल का तेल रगड़ो । उस के कानों में “ऐं ऐं” अथवा “ॐ ॐ” बोलें ।
*मनोरथ सिद्धि*
“गुरु ….गुरु” के जप से भक्तों का मनोरथ पूरा होता है |
*भगवान शिवजी कहते है: गुरु मंत्रों मुखे यस्य, तस्य सिद्धि न अन्यथा गुरु लाभात सर्व लाभों गुरु हीनस्थ बालिश: |*
जिसके जीवन में गुरु नही है उसका कोई सच्चा हित करने वाला भी नहीं है | जिसके जीवन में गुरु है वो चाहे बाहर से शबरी भीलन जैसा गरीब हो फिर भी सोने की लंका वाले रावन से शबरी आगे आ गयी, रविदास चमार हो फिर भी गुरु मन्त्र है मीरा के तारणहार हो गए |
गुरु शब्द बहुत powerful है और गुरुदर्शन, गुरु blessing बहुत बहुत कल्याण करता है | तो बोले ‘गु’कार सिद्धि प्रोक्तो रेफ़ पापस्य हारक | गुरु में ‘र’ जो है पापनाशक है | ‘ऊ’कारो विष्णु अव्यक्त: त्रेआत्मा: गुरु परः | ये तीनो शब्द गुरु शब्द के है | गुरु शब्द का ‘ग’कार सिद्धि देनेवाला, ‘र’कार पाप हरनेवाला ‘ऊ’कार अव्यक्त विष्णु भगवान से मिलानेवाला | गुरु वो है जो श्रेष्ठ है और तीनों से पार भी है | ये आगमसार ग्रंथ है उसका श्लोक मैंने तुमको सुनाया |
*पंo वेदान्त अवस्थी*

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