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मानस मंडल रीवा की मासिक संगोष्ठी संपन्न

By Janhit TV

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मानस मंडल मानस भवन रीवा की मासिक मानस संगोष्ठी संपन्न
मानस भवन में मानस मंडल द्वारा मानस संगोष्ठी का प्रारंभ शाम 5:00 बजे से हुआ सर्वप्रथम गोस्वामी तुलसीदास जी की मूर्ति पर माल्यार्पण मानस भवन में पधारे प्रबुद्ध मानस प्रेमियों द्वारा किया गया साथी भगवान श्री राम परिवार के चित्र पर माल्यार्पण दीप प्रज्वल एवं श्री राम चंद्र कृपालु भजमन स्तुति के साथ गोष्ठी प्रारंभ हुई I कार्यक्रम का संचालन करते हुए मानस मंडल के सचिव श्री संतोष अवधिया ने गोष्ठी के महत्त्व एवं श्री राम के आदर्शों पर चर्चा करते हुए सर्वप्रथम मानस मंडल के वरिष्ठ सदस्य डॉक्टर एच के पांडे जी जी को आमंत्रित किया डॉक्टर साहब ने कहा रामायण की चौपाइयां महामंत्र है हमारे पिताजी हमें बचपन से ही सिखाया था जब हम कहीं यात्रा पर जाएं तो “चलत विमान कुलाहल होई, जय रघुवीर कहे सब कोई I ” का स्मरण करने से यात्रा निर्विघ्न संपन्न होती है, कलयुग में हनुमान जी महाराज प्रत्यक्ष देवता ह उनके स्मरण से सभी कार्य संपन्न होते है I वरिष्ठ पत्रकार सी मुकुंद मिश्रा जी ने कहा रामचरितमानस से हमें मानवता एवं संस्कारों की प्राप्ति होती है मानस मंडल द्वारा हर महीने सुंदरकांड का पाठ मानस संगोष्ठी होना एक पुनीत काम है I मानस मंडल के पूर्व उपाध्यक्ष श्री पीयूष त्रिवेदी जी ने बताया कि सच का साथ ही सत्संग है और सत्य ईश्वर है I” बिन् सत्संग विवेक न होई ,राम कृपा विन सुलभ न सोई । ” सत्संग से आदर्श और संस्कार प्राप्त होते है I सज्जन पुरुषों का साथ हमेशा फलदाई होता है आपने मानस भवन में हो रहे कार्यक्रमों की प्रसंसा की । श्री महेश्वरी प्रसाद त्रिपाठी जी ने कहा कि रामचरितमानस से पारिवारिक संबंध किस प्रकार होना चाहिए हमें सीख मिलती है I मानस मंडल के वरिष्ठ सदस्य श्री संग्राम सिंह रामायणी भगवान राम की प्रार्थना के साथ कहां की रामचरितमानस मैं सत्संग ही प्रधान है शिवजी और माता पार्वती के सत्संग मे शिवजी कहते हैं ” गिरिजा संत समागम सम न लाभ कछु आन , बिनु हरि कृपा ना मिलहि सो गावही वेद पुरान ।” जब हमारे पूर्व जन्म के सत्कर्म जागृत होते हैं तभी ईश्वर कृपा प्राप्त होती है l आपने भगवान राम द्वारा माता सवरी को दी गई नवधा भक्ति के प्रसंग पर भी प्रकाश डाला । आर बी द्विवेदी जी ने हनुमान चालीसा की शक्ति के संबंध अपने अनुभव साझा करते हुए कहा की जब हम कीर्तन करते हैं तो एक ऊर्जा संचित होती और वही शक्ति हमारे संकट के समय में काम आती है I डी पी सिंह नोटरी ने रामचरितमानस की चौपाइयां का वाचन किया तथा कहा कि ईश्वर का भजन ही श्रेष्ठ है शेष सब सपना है I नगर सेठ महेंद्र सर्राफ जी ने कहा मानस की चौपाइयां मंत्र है सत्संग बड़े भाग्य से प्राप्त होता है I श्री हरीश चंद्र गुप्ता जी ने मानस भवन पहुंचकर सत्संग प्राप्त करना अपना सौभाग्य कहा। संस्कृत भारती के प्रदेश पत्राचार प्रमुख कीर्ति कुमार त्रिपाठी जी ने संस्कृत में अपना उद्बोधन करते हुए कहा कि श्रीरामचरितमानस में श्री राम के गुण अमित हैं भारत ही नहीं पूरे विश्व का मार्गदर्शन रामचरितमानस द्वारा होती है भगवान राम अनंत हैं मर्यादा पुरुषोत्तम हैं विष्णु जी के अवतार है परिवार में भाई-भाई पिता पुत्र पति पत्नी प्रेम का अनूठा उदाहरण है श्री रामचरितमानस का पठन पाठन श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए I श्रद्धेय हीरालाल त्रिपाठी जीने कहां की अयोध्या में जब रामजी का राज तिलक हो रहा था शिव जी जी ने स्वयं आकर स्तुति करते हुए कहा था “बार-बार बर् मांगउ हरसि देहु श्री रंग । पद सरोज अन पायनी भगति सदा सत्संग ।” अर्थात सत्संग की महिमा का गान शिव जी ने भी किया। आपने कहा कि सत्संग से ही सुख संभव है हनुमान जी से सत्संग होने के बाद ही विभीसण जी को भगवानश्री राम का दर्शन प्राप्त हुआ I आपने कहा कि हम जो कुछ भी है पिताजी के सत्संग का प्रभाव है राम चरित् मानस का नियमित पाठ मनन हमारे जीवन का प्रमुख अंग है। प्रात काल उठ के रघुनाथा , मातु पिता गुरु नावहि माथा । माता पिता के चरण स्पर्श का जीवन में अभूतपूर्व प्रभाव होता है I डॉ श्रीनिवास मिस्र जीने गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरितमानस का महत्व कहा कि अगर गोस्वामी तुलसीदास जी रामचरितमानस नहीं लिखते तो कलयुग के कुटिल जीवो को भवसागर से कौन पार करता । आपने कहा कि रामचरितमानस में हमारी सभी समस्याओं का समाधान है सत्संग पूर्वजन्मौ का फल है । मानस मंडल के संरक्षक सदस्य डी पी सिंह जी ने रामचरितमानस में भगवान राम के आदर्श पर अपनी बात रखी एवं गोष्ठी में सम्मिलित सभी महानुभावों का धन्यवाद किया अंत में मानस मंडल के प्रचार सचिव शिव शंकर प्रसाद दीक्षित ने श्री राम जी एवं भैया भरत के प्रेम प्रसंग पर अपनी बात कही तथा कहा कि रामचरितमानस के पठन से जीवन में बदलाव आना चाहिए पारिवारिक प्रेम बढ़ना चाहिए भाई भाई में हो रहे लड़ाई झगड़े मिटने चाहिए तभी मानस सत्संग की सार्थकता है। अंत में प्रसाद वितरण के साथ गोष्ठी का समापन हुआ I मानस मंडल के अध्यक्ष श्री सुभाष पांडे जी द्वारा विनम्र आग्रह है 30 जून मंगलवार को संगीत में सुंदरकांड का 5:00 बजे से होना है अतः समस्त मानस प्रेमी जन पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनावे।। जय श्री सीताराम ।।

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