* आज का पञ्चाङ्ग~
*दिनांक – 10 अगस्त 2026*
*दिन – सोमवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत् – 2083*
*शक संवत – 1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – दक्षिणायण*
*ऋतु – वर्षा*
*मास – श्रावण*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – द्वादशी सुबह 08:00 तक, तत्पश्चात् त्रयोदशी 11 अगस्त प्रातः 04:54 तक, तत्पश्चात् चतुर्दशी*
*नक्षत्र - आर्द्रा दोपहर 12:26 तक तत्पश्चात् पुनर्वसु*
*योग – वज्र रात्रि 10:27 तक तत्पश्चात् सिद्धि*
*राहुकाल – सुबह 07:30 से सुबह 09:00 तक*
*सूर्योदय – 05:29*
*सूर्यास्त – 06:31*
*दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*अग्निवास*
27+02+01=30÷4=02 पाताल लोक में।
*शिववास*
27+27+5=59÷7 =03 वृषारूढ़ा वासे।
*व्रत पर्व विवरण – द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत, सोमप्रदोष व्रत*
विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
* ब्राह्मणभविष्यत् वर्णन 3, सर्ग 266
हे साधो! जब यह पुरुष मर💀 जाता है तब इसका सूक्ष्म पुर्यष्टका जड़ हो जाती है और उसमें फिर त्रिलोकी फुर आती है | तुम देखो कि यदि सूक्ष्म ही में भासि आई और जो परमसूक्ष्म में सृष्टि बन जाती है तो मन्दिर में होने का क्या आश्चर्य है?
हे साधो! यह सर्व जगत् जो भासता है सो आत्मा✨ में स्थित है और उसका किञ्चन इस प्रकार ही भासता है | अब तुम जावो उनको राज्य भुगावो |
हे कुन्ददन्त! जब इस प्रकार ब्रह्माजी कहेंगे तब वर नमस्कार करके आधिभौतिक शरीर त्याग देंगे और अन्तवाहक शरीर से उनके हृदय में स्थित होंगे | जैसे एक शत्रु को दूर करके दूसरा स्थित हो तैसे ही शाप को दूर करके उनके हृदय में वर आन स्थित हुए और उनको त्रिलोकी भासने लगी और पुर्यष्टका को अन्तः पुर में वर ने रोक छोड़ा | जैसे बाँध जल💧 को रोकता है तैसे ही उनकी पुर्यष्टका को वर ने रोका |
हे कुन्ददन्त! इस प्रकार उनको अपने अन्तःपुर में सृष्टि भासी और उन्होंने जाना कि हम सातों द्वीप के राजा हुए हैं | इस प्रकार वे आठों उस अन्तःपुर में सातों द्वीप पृथ्वी के राजा हुए परन्तु परस्पर अज्ञात रहे | एक सप्तद्वीप का राजा हुआ और जम्बूद्वीप में जो उज्जैन नगर है उसमे उसकी राजधानी हुई | दूसरा कुशद्वीप में रहने लगा, तीसरा क्रौंच मे रहने लगा, चौथा शाकद्वीप का राजा हुआ और उससे हरकारे कहने लगे कि पाताल के नाग बड़े दुष्ट हैं उनको किसी प्रकार जीतो |
तब वह समुद्र के मार्ग से पाताल में नागों को जीतने जावेगा और एक द्वीप में अपनी स्त्री से शान्त हो जावेगा | पाँचवाँ शाल्मलिद्वीप में स्थित होगा जहाँ बड़ी प्रकाशसंयुक्त, स्वर्ण की पृथ्वी है | वहाँ एक पर्वत होगा और उसके ऊपर एक ताल होगा जिसमें वह विद्याधरों से लीला करता फिरेगा | और दिग्विजय करके आवेगा | उसकी प्रजा बड़ी धर्मात्मा और मानसी पीड़ा से रहित होगी |
छठा गोमेदक नाम द्वीप में होगा और उसका युद्ध पुष्करद्वीपवाले से होगा | सातवाँ पुष्करद्वीप का राजा होगा जो गोमेदकवाले राजा से युद्ध करेगा और आठवाँ लोकालोक पर्वत का राजा होगा |
हे कुन्ददन्त! इस प्रकार वे अपने अन्तःपुर में सृष्टि देखेंगे और राज्य भोगेंगे परन्तु परस्पर उनकी सृष्टि अदृश्य होगी | सबकी राजधानी भी मैंने तुझसे कही कि एक की जम्बूद्वीप के उज्जैन नगर में, दूसरे की कुशद्वीप में, तीसरे की क्रौंचद्वीप में, चौथे की शाकद्वीप में, पाँचवें की शाल्मलिद्वीप में, छठे की गोमेदकद्वीप में सातवें की पुष्करद्वीप में और आठवें की लोकालोक पर्वत की स्वर्णमय पृथ्वी में होगी |
हे साधो | इस प्रकार उनकी भविष्यत् होगी सो मैंने सब तुमसे कही | जैसा हृदय में निश्चय होता है तैसा ही फल होता है | बाहर कैसी ही क्रिया⚙️ करो और भीतर सत्ता नहीं तो वह फलदायक नहीं होती है | जैसे नट, स्वाँग बनाकर चेष्टा करता है परन्तु उसके भीतर उसका सद्भाव नहीं होता इससे वह फलदायक नहीं होती | हे साधो! जैसा हृदय में निश्चय होता है वही वरदायक होता है, इसलिये परमार्थ का निश्चय करना योग्य है |
10 अगस्त 2026 दिन सोमवार पूर्व दिशा गुरु उदय प्रातः 07:52 बजे।
*पंचक*
27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार दोपहर 01:35 बजे से 31 अगस्त 2026 दिन सोमवार रात्रि 03:24 बजे तक।
*एकादशी*
23 अगस्त 2026 दिन रविवार पुत्रदा एकादशी।
*प्रदोष व्रत*
10 अगस्त 2026 दिन सोमवार प्रदोष व्रत।
11 अगस्त 2026 दिन मंगलवार मासिक शिवरात्रि।
25 अगस्त 2026 दिन मंगलवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार व्रत पूर्णिमा।
28 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार स्नान दान पूर्णिमा। रक्षा बंधन।
*अमावस्या*
12 अगस्त 2026 दिन बुधवार देव पितृ कार्य हरियाली अमावस्या।
*पंo वेदान्त अवस्थी*





