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गुढ़ नगर परिषद अध्यक्ष, अर्चना सिंह को माननीय न्यायालय ने दिया बड़ा झटका!

By Janhit TV

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*लोकायुक्त के जाल में फंसे पति कल्याण के बाद अब भ्रष्टाचार की नींव के तले बनी नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना सिंह का भी कार्यकाल हाईकोर्ट ने किया समाप्त*

*गुढ़ नगर परिषद अर्चना सिंह माननीय न्यायालय से लगा बड़ा झटका, अपने बचाव में दायर की गई याचिका को निरस्त कर दिया गया*

*विपक्ष के पार्षदों को बदनाम करने और अपनी कुर्सी बचाने के लिए चली चला, कोर्ट में जज के सामने नहीं काम आई राजनीतिक चाल*

*✍🏻 विकास तिवारी*
गुढ़। रीवा जिले की गुढ़ नगर परिषद हमेशा से चर्चा में रही है जब से नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी डॉक्टर अर्चना सिंह ने संभाली है जैसा कि आपको बता दिया जाए की जब से कुर्सी में बैठी है तब से भ्रष्टाचार की नींव के तले अनेकों कार्य कर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया है। जैसे कि फर्जी नियुक्तियां अवैध अतिक्रमण और कागजों में विकास कार्य ऐसे कई कारनामे है। जिसमें लगातार नगर परिषद अध्यक्ष के द्वारा भ्रष्टाचार किया जा रहा है और आज उसे भ्रष्टाचार का अंत हो गया। बीते दिनों आपको बता दिया जाए भ्रष्टाचार के नींव के तले बनी अध्यक्ष की कुर्सी में अध्यक्ष के अलावा उनके पति भी लोकायुक्त की शिकंजे में फंस चुके हैं। और यह पहली बार नहीं है इसके पहले भी डॉक्टर कल्याण सिंह व्यापम घोटाले में फस चुके थे और जेल की हवा भी खा चुके थे। लेकिन राजनीतिक पहुंच और राजनीतिक नेताओं से संबंध के चलते उसे भ्रष्टाचार को कलम के कीचड़ के नीचे दबा दिया गया। जहां आपको बता दिया जाए की लंबे समय से अविश्वास प्रस्ताव के लेकर विपक्ष के पार्षदों के द्वारा की जा रही मेहनत पर आज अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई। और नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना सिंह को माननीय उच्च न्यायालय से एक बड़ा झटका लगा और न्यायालय ने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ अपने बचाव में अध्यक्ष अर्चना सिंह द्वारा दायर की गई। याचिका को पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ न्यायालय ने रीवा कलेक्टर को निर्देशित किया है कि आगामी 30 दिनों के भीतर अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ी तमाम वैधानिक कार्यवाही और प्रशासनिक कार्यवाही को अनिवार्य रूप से पूर्ण करें और न्यायालय के आदेश के अनुसार गुढ़ नगर परिषद में लगाए गए अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया को पूर्ण कर एक नया अध्यक्ष चुने का समय निर्धारण किया जाए।

*नगर परिषद गुढ़ अध्यक्ष ने कुर्सी बचाने चली राजनीतिक चाल, ऑडियो क्लिप कोर्ट ने किया दरकिनार*
कोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना सिंह की ओर से अपनी राजनीतिक चाल के द्वारा अपने निजी वाहन चालक का इस्तेमाल कर पार्षदों को गुमराह करने के उसमें से फोन करवाया और अपनी राजनीतिक साख और कुर्सी बचाने के लिए चाल चलते हुए एक पुराने मामले को उठाया और उसके बाद पैसे के लेनदेन को लेकर बातचीत की और उसका ऑडियो क्लिप रिकॉर्ड कर लिया और उसे ऑडियो क्लिप को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। और याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इस ऑडियो क्लिप में परिषद के कुछ पार्षद अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में वह समर्थन अपना वापस लेने के बदले में पैसे की मांग कर रहे हैं। हालांकि उच्च न्यायालय ने इन साक्ष्यों को खारिज करते हुए स्पष्ट तौर पर कहा कि ऑडियो क्लिप का न्यायालय की वैधानिक प्रक्रिया और वर्तमान विधिक मामले से कोई लेना-देना नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अविश्वास प्रस्ताव एक लोकतांत्रिक और वैधानिक प्रक्रिया है इसे नियमों के दायरे में रह कर तय किया जाएगा। और यह जो ऑडियो क्लिप में आप सुन रही हैं वह बैकल्पनिक आधार पर कार्यवाही नहीं की जा सकती है।

*कोर्ट का का हस्तक्षेप समाप्त अब माननीय कलेक्टर पर टिकी निगाहें*
कोर्ट के आदेश के बाद रीवा के साथ-साथ गुढ़ में भी राजनीतिक गलियों में हलचल तेज हो गई है। की गुढ़ के स्थानीय लोगों का कहना है कि अब माननीय उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद अध्यक्ष अर्चना सिंह और उनके समर्थक के खेमे के पास अब कोई भी ठोस कानूनी विकल्प शेष नहीं रह गया है। अब अब पूरा खेल प्रशासनिक पाले में है। और न्यायालय द्वारा निर्धारित की गई 30 दिनों की सख्त समय सीमा के भीतर जिला प्रशासन और रीवा कलेक्टर को मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम के तहत अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में आगे विधाई प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उल्लेखनीय है कि गुढ़ नगर परिषद के अधिकांश पार्षदों ने एकजुट होकर अध्यक्ष अर्चना सिंह के खिलाफ और उनके कार्यशैली पर असंतोष व्यक्त करते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और माननीय कलेक्टर के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव की मांग की थी इस अविश्वास प्रस्ताव से बचने के लिए अध्यक्ष द्वारा लगातार कानूनी चाल चली जा रही थी। और कानून का संरक्षण लेने का प्रयास किया जा रहा था। लेकिन अब उस पर उच्च न्यायालय ने विराम लगा दिया है। और अब कोई भी कानूनी संरक्षण लेने का विकल्प भी नहीं बचा है अब पति के विदाई के बाद पत्नी का भी विदाई का समय आ चुका है।

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