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आज का पंचांग 3 अक्टूबर 2026

By Janhit TV

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*~ आज का पञ्चाङ्ग~*
*दिनांक – 03 अक्टूबर 2026*
*दिन – शनिवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत् – 2083*
*शक संवत – 1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – दक्षिणायण*
*ऋतु – शरद*
*मास – आश्विन*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – सप्तमी सुबह 07:59 तक, तत्पश्चात् अष्टमी प्रातः 05:51 अक्टूबर 04 तक, तत्पश्चात् नवमी*
*नक्षत्र – आर्द्रा मध्यरात्रि 01:29 तक तत्पश्चात् पुनर्वसु*
*योग – वरीयान् दोपहर 03:21 तक तत्पश्चात् परिघ*
*राहुकाल – सुबह 09:00 से सुबह 10:30 तक*
*सूर्योदय – 06:07*
*सूर्यास्त – 05:53*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*अग्निवास*
27+06+01=34÷4=02 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास*
27+27+5=59÷7 =03 वृषारूढ़ा वासे।
व्रत पर्व विवरण – सप्तमी, अष्टमी का श्राद्ध, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, जीवित्पुत्रिका व्रत, महालक्ष्मी व्रत पूर्ण
विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)
चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।
श्राद्ध पक्ष में एक लोटा जल और एक चुटकी आटे का करें यह गुप्त उपाय! पितर होंगे संतुष्ट, घर में बढ़ेगी सुख-समृद्धि
*पुष्य नक्षत्र योग*

04 अक्टूबर 2026 रविवार को मध्यरात्रि 12:13 से 05 अक्टूबर सूर्योदय तक रविपुष्यामृत योग है ।
१०८ मोती की माला लेकर जो गुरुमंत्र का जप करता है, श्रद्धापूर्वक तो २७ नक्षत्र के देवता उस पर खुश होते हैं और नक्षत्रों में मुख्य है पुष्य नक्षत्र, और पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं देवगुरु ब्रहस्पति | पुष्य नक्षत्र समृद्धि देनेवाला है, सम्पति बढ़ानेवाला है | उस दिन ब्रहस्पति का पूजन करना चाहिये | ब्रहस्पति को तो हमने देखा नहीं तो सद्गुरु को ही देखकर उनका पूजन करें और मन ही मन ये मंत्र बोले –

*ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |…… ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |*

*3 अक्टूबर को लक्ष्मी प्राप्ति के लिए करले यह कार्य*
*कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में*

बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें |

*रविपुष्यामृत योग*

‘शिव पुराण’ में पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विभूति बताया गया है | पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोष भी समाप्त और निष्फल-से हो जाते हैं, वे हमारे लिए पुष्य नक्षत्र के पूरक बनकर अनुकूल फलदायी हो जाते हैं | ‘सर्वसिद्धिकर: पुष्य: |’ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है | पुष्य नक्षत्र में किये गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति होती है तथा कर्ता को धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है |

इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं | (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याय 10)

*श्राद्धकर्म*

अगर श्राद्धकर्म करने के लिए आपके पास बिल्कुल भी धन नहीं है तो आपको उधार मांगकर धन लेना चाहिए और श्राद्ध करना चाहिए। अगर आपको कोई उधार नहीं दे रहा तो पितरों के उद्देश्य से पृथ्वी पर भक्ति विनम्र भाव से सात आठ तिलों से जलाञ्जलि ही दे दें। अगर यह भी संभव नहीं तो कहीं से चारा लाकर गौ को खिला दें। और अगर इतना भी संभव नहीं तो अपनी बगल दिखाते हुए सूर्य तथा दिक्पालों से कहें :

*”न मेऽस्ति वित्तं न धनं चान्यच्छ्राद्धोपयोग्यं स्वपितॄन्‌नतोऽस्मि ।*

*तृप्यन्तु भत्त्या पितरो मयैतौ कृतौ भुजौ वर्त्मनि मारुतस्य ।।”*
‘मेरे पास श्राद्धकर्म के योग्य न धन-संपति है और न कोई अन्य सामग्री। अत: मै अपने पितरों को प्रणाम करता हूँ। वे मेरी भक्ति से ही तृप्तिलाभ करे। मैंने अपनी दोनों भुजाएं आकाश में उठा रखी हैं ।
ऐसा विवरण विष्णुपुराण तृतीयांश, अध्यायः 14 तथा वराहपुराण अध्याय 13 में मिलता है।
*शरद नवरात्रि*
11 अक्टूबर 2026 दिन रविवार
सुबह 08:05 से 09:31 बजे तक चंचल वेला, दिवा 09:31 से 12:24 तक लाभ अमृत, दोपहर 12:01 से 12:47 बजे तक अभिजित वेला में पूजन करना शुभ रहेगा।
19 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार
महाष्टमी, दुर्गा नवमी वृत।
20 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार
नवरात्रि वृत पारण 09:35 बजे तक।
*एकादशी*
06 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार इंदिरा एकादशी व्रत सर्वे।
22 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार पापांकुशा एकादशी व्रत सर्वे।
*प्रदोष व्रत*
08 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार प्रदोष व्रत (मासिक शिवरात्रि)।
23 अक्टूबर 2036 दिन शुक्रवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
25 अक्टूबर 2026 दिन रविवार वृत शरद पूर्णिमा।
26 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार स्नान दान पूर्णिमा।
*अमावस्या*
10 अक्टूबर 2026 दिन शनिवार देवकार्य सर्व पितृ विसर्जन अमावस्या।
*पंo वेदान्त अवस्थी*

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