*आज का पञ्चाङ्ग*
*दिनांक – 25 अक्टूबर 2026*
*दिन – रविवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत 2083*
*शक संवत -1948*
*अयन – दक्षिणायन*
*ऋतु – शारद ॠतु*
*मास – आश्विन*
*पक्ष – शुक्ल*
*तिथि – चतुर्दशी सुबह 11:55 तक तत्पश्चात पूर्णिमा*
*नक्षत्र – रेवती शाम 07:22 तक तत्पश्चात अश्विनी*
*योग – हर्षण शाम 05:22 तक तत्पश्चात वज्र*
*राहुकाल – शाम 04:30 से शाम 06:00 तक*:
*सूर्योदय – 06:24*
*सूर्यास्त – 05:36*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे*
*अग्निवास*
14+01+01=16÷4=00 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास*
14+14+5=33÷7 =05 भोजनचैव वासे।
*व्रत पर्व विवरण – व्रत पूर्णिमा,कोजागरी पूर्णिमा,शरद पूर्णिमा (खीर चंद्रकिरणो मे रखे),पंचक (समाप्त : रात्रि 07:22)*
विशेष- चतुर्दशी व पूर्णिमा एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
✨ चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)
✨ चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।
*कार्तिक मास में स्नान की महिमा*
26 अक्टूबर 2026 सोमवार से कार्तिक व्रत-स्नान आरम्भ (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार 10 नवम्बर 2026 मंगलवार से कार्तिक मास प्रारंभ)
कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले स्नान करने की बड़ी भारी महिमा है और ये स्नान तीर्थ स्नान के समान होता है l
*कार्तिक मास में जप*
कार्तिक मास में अपने गुरुदेव का सुमिरन करते हुए जो “ॐ नमो नारायणाय” का जप करता है, उसे बहुत पुण्य होता है |
*कार्तिक मास*
स्कंद पुराण में लिखा है : ‘कार्तिक मास के समान कोई और मास नहीं हैं, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है, वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान दूसरा कोई तीर्थ नहीं है ।
*पूर्णिमा*
25 अक्टूबर 2026 दिन रविवार वृत शरद पूर्णिमा।
26 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार स्नान दान पूर्णिमा।
*पंo वेदान्त अवस्थी*


