*आज का पञ्चाङ्ग*
*दिनांक – 05 नवम्बर 2026*
*दिन – गुरूवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत 2083*
*शक संवत -1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – दक्षिणायन*
*ऋतु – हेमंत ॠतु*
*मास – कार्तिक*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – एकादशी सुबह 10:35 तक तत्पश्चात द्वादशी*
*नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी 06 नवंबर रात्रि 03:55 तक तत्पश्चात हस्त*
*योग – वैधृति 06 नवम्बर प्रातः 05:09 तक तत्पश्चात विष्कंभ*
*राहुकाल – दोपहर 01:30 से शाम 03:00 तक*
*सूर्योदय – 06:30*
*सूर्यास्त – 05:30*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे*
*अग्निवास*
26+05+01=32÷4=00 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास*
26+26+5=57÷7 =01 कैलाश वासे।
व्रत पर्व विवरण – रमा एकादशी,ब्रह्मलीन मातुश्री श्री माॅ महॅगीबाजी का महानिर्वाण दिवस,गोवत्स द्वादशी
विशेष- हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l *राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
✨ एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है।
✨ एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।
✨ एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।
✨ जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।
✨ चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)
✨ चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।
*रमा एकादशी*
05 नवम्बर, गुरुवार को रमा एकादशी है।*
रमा एकादशी ( यह व्रत बड़े – बड़े पापों को हरनेवाला, चिन्तामणि तथा कामधेनु के समान सब मनोरथों को पूर्ण करनेवाला है |
*धनतेरस*
*06 नवम्बर 2025 शुक्रवार को धनतेरस है ।*
कार्तिक कृष्ण (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अश्विन) त्रयोदशी के दिन को धनतेरस कहते हैं । भगवान धनवंतरी ने दुखी जनों के रोग निवारणार्थ इसी दिन आयुर्वेद का प्राकट्य किया था । इस दिन सन्ध्या के समय घर के बाहर हाथ में जलता हुआ दीप लेकर भगवान यमराज की प्रसन्नता हेतु उन्हे इस मंत्र के साथ दीप दान करना चाहिये-
*मृत्युना पाशदण्डाभ्याम् कालेन श्यामया सह ।*
*त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम ॥*
(त्रयोदशी के इस दीपदान के पाश और दण्डधारी मृत्यु तथा काल के अधिष्ठाता देव भगवान देव यम, देवी श्यामला सहित मुझ पर प्रसन्न हो।)
*गोवत्स द्वादशी*
कार्तिक मास (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अश्विन मास) की द्वादशी को गोवत्स द्वादशी कहते हैं । इस दिन यानी 05 नवम्बर 2026 गुरुवार को दूध देने वाली गाय को उसके बछड़े सहित स्नान कराकर वस्त्र ओढाना चाहिये, गले में पुष्पमाला पहनाना , सींग मढ़ना, चन्दन का तिलक करना तथा ताम्बे के पात्र में सुगन्ध, अक्षत, पुष्प, तिल, और जल का मिश्रण बनाकर निम्न मंत्र से गौ के चरणों का प्रक्षालन करना चाहिये ।
*क्षीरोदार्णवसम्भूते सुरासुरनमस्कृते ।*
*सर्वदेवमये मातर्गृहाणार्घ्य नमो नमः ॥*
(समुद्र मंथन के समय क्षीरसागर से उत्पन्न देवताओं तथा दानवों द्वारा नमस्कृत, सर्वदेवस्वरूपिणी माता तुम्हे बार बार नमस्कार है।)
🐄 पूजा के बाद गौ को उड़द के बड़े खिलाकर यह प्रार्थना करनी चाहिए-
⚜️ *“सुरभि त्वं जगन्मातर्देवी विष्णुपदे स्थिता ।*
*सर्वदेवमये ग्रासं मया दत्तमिमं ग्रस ॥*
*ततः सर्वमये देवि*
*मातर्ममाभिलाषितं सफलं कुरू नन्दिनी ॥“*
🙏🏻 (हे जगदम्बे ! हे स्वर्गवासिनी देवी ! हे सर्वदेवमयी ! मेरे द्वारा अर्पित इस ग्रास का भक्षण करो । हे समस्त देवताओं द्वारा अलंकृत माता ! नन्दिनी ! मेरा मनोरथ पूर्ण करो।) इसके बाद रात्रि में इष्ट , ब्राम्हण , गौ तथा अपने घर के वृद्धजनों की आरती उतारनी चाहिए।
*पंचक*
17 नवम्बर 2026 दिन मंगलवार साय 03:30 बजे से 21 नवम्बर 2026 दिन शनिवार रात्रि 09:54 बजे तक।
*एकादशी*
20 नवम्बर 2026 दिन शुक्रवार हरिप्रबोधिनी देव उठानी एकादशी।
*प्रदोष व्रत*
06 नवम्बर 2026 दिन शुक्रवार प्रदोष व्रत धन तेरस।
22 नवम्बर 2026 दिन रविवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
24 नवम्बर 2026 दिन मंगलवार स्नान दान वृत पूर्णिमा।
*अमावस्या*
08 नवम्बर 2026 दिन रविवार पितृ कार्य अमावस्या। (दीपावली)
09 नवम्बर 2026 दिन सोमवार देवकार्य सोमवती अमावस्या।






