होम मध्य प्रदेश रीवा सीधी सिंगरौली सतना भोपाल इंदौर जबलपुर

कीचड़ में समाया रौरा ग्राम, खटिया पर निकली शवयात्रा*

By Janhit TV

Published on:

---Advertisement---

**विकसित भारत के बीच कीचड़ में समाया रौरा ग्राम, खटिया पर निकली शवयात्रा*
रीवा। जनपद पंचायत गंगेव
अंतर्गत रौरा ग्राम पंचायत के बगल में निवासी आवागमन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आजादी के लंबे अर्से के बाद भी यहां के निवासी मुख्य मार्ग से नहीं जुड़ पाए। इनकी दिनचर्या यह बन चुकी है कि कीचड़ में लथपथ ,उबड़ खाबड़़ मार्ग से चलकर दैनिक जीवन जी रहे हैं। यहां तक कि मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकती वहीं लाश ले जाने के लिए लोगों को चारपाईयों सहारा लेना पड़ रहा है। सबसे पीड़ादायक दृश्य तो बुधवार की सुबह देखने को मिला। जब 21वीं सदी के भारत देश में एक शव को खाटिया पर रखकर लगभग एक किलोमीटर तक दो फिट सने कीचड़ में ले जाना पड़ा। क्योंकि गाँव तक पहुँचने के लिए सड़क नहीं थी? सोचनीय बात यह है कि जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी समाज का हिस्सा बनकर जीवन बिताया। उसके अंतिम सफर में भी उसके अपने लोग उसे सड़क तक पहुँचाने के लिए खाटिया का सहारा लेने को मजबूर रहे। सूत्रों के अनुसार
यह केवल एक शव की तस्वीर नहीं बल्कि यह हमारी ग्रामीण व्यवस्था और विकास के दावों की पोल खोल रहा है। एक तरफ हम विकसित भारत की बात करते हैं, आधुनिक भारत का सपना देखते हैं, नई-नई योजनाओं और विकास परियोजनाओं की चर्चा करते हैं। दूसरी तरफ हमारे गाँवों में आज भी लोग अपने घर और पंचायत तक पहुँचने वाली सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बारिश के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। कीचड़ और पानी से भरे रास्तों के कारण बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को भारी परेशानी होती है। किसी गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में एंबुलेंस तक पहुँचाना मुश्किल हो जाता है। क्या यही विकासशील भारत देश का सपना है? और जब किसी परिवार में मृत्यु होती है, तो अंतिम यात्रा भी सड़क के अभाव में संघर्ष बन जाती है। यह किसी राजनीतिक दल के खिलाफ आरोप नहीं है। बल्कि
यह एक गाँव की पीड़ा है, ग्रामीणों की आवाज़ है और एक बुनियादी अधिकार की मांग है। ग्रामीणों ने शासन -प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से विनम्र लेकिन गंभीर अपील है कि ग्राम पंचायत रौरा की इस समस्या का तत्काल संज्ञान लिया जाए और सड़क निर्माण की ठोस पहल की जाए।
क्योंकि विकास की असली परीक्षा बड़े शहरों की चौड़ी सड़कों पर नहीं होती।विकास की असली पहचान उस आखिरी घर तक पहुँचने वाली सड़क से होती है। जिस गाँव में किसी जीवित व्यक्ति को अस्पताल पहुँचाने और किसी मृत व्यक्ति को अंतिम यात्रा तक ले जाने के लिए भी सड़क उपलब्ध न हो, वहाँ विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब सिर्फ आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए। सिर्फ कागजों पर विकास नहीं, जमीन पर विकास चाहिए। गाँव की आवाज़ सुनी जाए।

Leave a Comment