*MP में कर्ज बम फटा – 5.33 लाख करोड़ के कर्ज तले दबा मध्यप्रदेश, हर बच्चा पैदा होते ही 55 हजार का कर्जदार, टैक्स का पैसा कहां गया, जनता ने पूछा और सरकार की उड़ी नींद*
*मालवा से विंध्य तक चौपालों में उबाल, मिडिल क्लास और युवा आगबबूला, कांग्रेस बोली भाजपा ने आत्मनिर्भर की जगह बना दिया EMI प्रदेश, सरकार बोली यह निवेश है कर्ज नहीं*
भोपाल। मध्यप्रदेश पर बढ़ते 5.33 लाख करोड़ से अधिक के भारी-भरकम कर्ज ने अब सूबे की सियासत के साथ-साथ आम जनता के सब्र का बांध भी तोड़ दिया है। हर महीने हजारों करोड़ रुपये की नई उधारी की खबरों ने प्रदेश के आर्थिक भविष्य पर एक गंभीर और तीखा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
*सोशल मीडिया से चौपाल तक फूटा जनता का गुस्सा*
सोशल मीडिया से लेकर मालवा और विंध्य के जमीनी चौपालों तक, आम जनता सरकार की इस वित्तीय नीति पर आगबबूला है। रीवा, इंदौर, भोपाल से लेकर ग्वालियर तक हर जगह इसी कर्ज की चर्चा है। जनता के बीच भारी आक्रोश और चिंता देखी जा रही है।
*मिडिल क्लास का सवाल – टैक्स का पैसा आखिर जा कहां रहा है*
सबसे बड़ा दर्द टैक्स भरने वाले मध्यवर्गीय परिवारों और छोटे व्यापारियों को है। जनता का सीधा सवाल है कि जब हर नवजात बच्चा अपने सिर पर 55,000 से ज्यादा का कर्ज लेकर पैदा हो रहा है, तो फिर उनके टैक्स का पैसा आखिर जा कहां रहा है? लोग पूछ रहे हैं कि कर्ज लेकर आखिर विकास कहां हो रहा है।
*युवाओं में नाराजगी – कर्ज रॉकेट की रफ्तार से, नौकरी ठंडे बस्ते में*
युवाओं में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि कर्ज का ग्राफ तो रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रहा है, लेकिन रोजगार के नए अवसर और सरकारी भर्ती की फाइलें ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। बेरोजगार युवा कह रहे हैं कि कर्ज लेकर सरकार इवेंट कर रही है लेकिन नौकरी नहीं दे रही।
*विपक्ष का हमला – आत्मनिर्भर नहीं कर्ज-निर्भर बना दिया प्रदेश*
इधर, विपक्ष कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर कड़ा और आक्रामक रुख अपनाते हुए सरकार को पूरी तरह घेर लिया है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार ने मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय कर्ज-निर्भर और EMI प्रदेश में तब्दील कर दिया है। विपक्ष का दावा है कि विकास के बड़े-बड़े विज्ञापनों और इवेंट्स के नाम पर जनता पर यह आर्थिक बोझ लादा जा रहा है।
*सरकार का बचाव – यह कर्ज नहीं पूंजीगत निवेश है*
हालांकि, सरकार इसे पूंजीगत निवेश बताकर अपना बचाव कर रही है। सरकार का तर्क है कि यह पैसा सड़क, बिजली, पानी और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाया जा रहा है, लेकिन जनता इस तर्क से सहमत नजर नहीं आ रही।
*सिर्फ आंकड़ा नहीं जनता की आवाज है*
यह खबर सिर्फ एक आर्थिक आंकड़े की नहीं, बल्कि उस जनता की तीखी आवाज है जो अब अपने अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का हिसाब मांग रही है।






