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लोकतंत्र में जब जनता ही सब कुछ है! तो फिर जनता की आवाज कुचलने का कुचक्र क्यों,,,?

By Janhit TV

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*जब पंकज श्रीवास्तव को हटाना ही पड़ा,,,,,,,,, तो फिर क्यों भदद् पिटवाई जिला प्रशासन मऊगंज ने* ______ (वरिष्ठ पत्रकार राज नारायण मिश्रा रीवा ) *मध्यप्रदेश के नये नवेले जिला मुख्यालय मऊगंज में कलेक्टर कार्यालय में अटैच प्रयोग शाला का परिचारक,, जिसे संभवतः भृत्य की परिधि में माना जा सकता है किसी राजनीतिक जुगाड में नये जिले के शुभारंभ में कलेक्टर कार्यालय में अटैच कर दिया गया था जिसके खिलाफ पूर्व कलेक्टर के समय से ही अवैध वसूली करने,,,आम जनता से दुर्व्यवहार करने,,,आम जनता की फाईल गायब करने,,, तथा अपने आपको कलेक्टर कार्यालय का सर्वेसर्वा निरूपित करने का एक ढर्रा बना लिया था,,,आम जनता अपने काम को लेकर भटकती है जब लगता है कुछ ले देकर काम हो रहा है तो माध्यम खोजती है ,,और मजबूरी में घूंस देकर अपना काम कराने को विवस हो जाती है,,यह प्रथा कामोवश मध्यप्रदेश में हर शासकीय दफ्तर की है बल्लभ भवन भी इससे अछूता शायद नहीं होगा,,,, राजनीतिक गलियारों में तो इसी काम के लिए बहुतायत लोग आरारोड लगा कुर्ता पहने बैठे रहते हैं,, लंबे समय से मऊगंज में पंकज श्रीवास्तव नामक कर्मचारी को लेकर आग सुलग रही थी, परन्तु घूस में वसूली जाने वाली मोटी रकम के बजन से यह विरोध की आग बुझ जाती थी, परन्तु जब विरोध शुरू हो जाता है तो लोकतांत्रिक आवाज को प्रशासनिक गलियारों में बैठे आला अधिकारियों की हठधर्मिता,, कानून का अमलीजामा पहनाना उतना उपयुक्त नहीं होता जितना अधिक कलेक्टर मऊगंज ने अपनी भद्द पिटवाने के बाद उक्त चहेते को पिछली तारीख में हटाने की विवशता सामने आई,, भले की बचाव या जबाब या दबाव का असर चलता रहा हो लेकिन जब हटाना ही पड़ा लिखना पड़ा की जांच जारी है तो जांच लंबे समय से चल रही होगी तो फिर इतने बेहूदे नारे एवं आरोप के बीच फंसने की क्या जरूरत रही होगी,, कड़कड़ाती सर्दी में खुले बदन सड़कों पर लेटे हुए इन जन मानस की अवस्था,, स्थिति से यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा की जन मानस सड़क पर उतर सकता था जो संभालने की स्थिति पैदा हो जाती,,आम आदमी अपने क्षेत्र,समाज, की एकता के लिए उस तरह समर्पित हो जाता है फिर यह नहीं देखता की यह किस मुकाम पर जायेगा,, सड़कों पर कड़कड़ाती सर्दियों में खुले बदन लेटे हुए लोगों को जेल भेजना,,, पुलिस की तानाशाही परोसना,,, कानून व्यवस्था के नाम लोकतांत्रिक आवाज को कुचलने की कुचेष्टाओं को परिलक्षित करना फिर उक्त कर्मचारी को हटा कर अपनी विवशता को सार्वजनिक करना किसी अनुभवी जिला कलेक्टर के लिए उपयुक्त निर्णय नहीं, भले ही कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्य की हदें कुछ भी रहतीं हैं,,,*

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