*आज का पञ्चाङ्ग*
*दिनांक – 07 जून 2026*
*दिन – रविवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत 2083*
*शक संवत -1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – उत्तरायण*
*ऋतु – ग्रीष्म ॠतु*
*मास – अधिक ज्येष्ठ*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – सप्तमी 08 जून रात्रि 03:24 तक तत्पश्चात अष्टमी*
*नक्षत्र – धनिष्ठा सुबह 07:55 तक तत्पश्चात शतभिषा*
*योग – वैधृति सुबह 10:02 तक तत्पश्चात विष्कंभ*
*राहुकाल – शाम 04:30 से शाम 06:00 तक*
*सूर्योदय – 05:14*
*सूर्यास्त – 06:46*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे*
*अग्निवास*
22+01+01=24÷4=00 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास*
22+22+5=49÷7 =00 श्मशान वासे।
व्रत पर्व विवरण- विजया सप्तमी,रविवारी सप्तमी (सूर्योदय से 08 जून प्रात: 03:24 तक)
विशेष- सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
रविवार के दिन तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)
रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)
स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।
*घातक रोगों से मुक्ति पाने का उपाय*
07 जून रविवार को सूर्योदय से 08 जून प्रातः 03:24 तक विजया सप्तमी एवं रविवारी सप्तमी है।
रविवार सप्तमी के दिन बिना नमक का भोजन करें। बड़ दादा के १०८ फेरे लें । सूर्य भगवान का पूजन करें, अर्घ्य दें व भोग दिखाएँ, दान करें । तिल के तेल का दिया सूर्य भगवान को दिखाएँ ये मंत्र बोलें :-
*”जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।”*
नोट : घर में कोई बीमार रहता हो या घातक बीमारी हो तो परिवार का सदस्य ये विधि करें तो बीमारी दूर होगी ।
*विजया सप्तमी*
👉🏻 विजया सप्तमी को किया हुआ स्नान, दान, ध्यान, जप, तप, होम और उपवास – सब कुछ बड़े-बड़े पातकों का नाश करनेवाला है। (ब्रह्म पुराण)
👉🏻 धर्मशास्त्रों के अनुसार विजया सप्तमी का व्रत रखने और सूर्य देव को अर्घ्य देने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं। यहाँ तक कि अनजाने में किए गए बड़े पापों से भी मुक्ति मिलती है।
भगवान सूर्य को ‘आरोग्य का कारक’ माना गया है। इस दिन व्रत रखने या केवल तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल अर्पित करने से गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा व तेज बढ़ता है।
सरल शब्दों में कहें तो, यह दिन स्वयं भगवान सूर्य नारायण की विशेष कृपा पाने और जीवन की हर कठिनाई पर ‘विजय’ प्राप्त करने का एक दिव्य अवसर है।
*पंचक*
06 जून 2026 दिन शनिवार शाम 07:04 बजे से 11 जून 2026 दिन गुरुवार सुबह 08:16 बजे तक।
*एकादशी*
11 जून 2026 दिन गुरुवार पुरुषोत्तमा एकादशी व्रत सर्वे।
25 जून 2026 दिन गुरुवार भीमसेनी निर्जला एकादशी व्रत सर्वे।
*प्रदोष व्रत*
12 जून 2026 दिन शुक्रवार प्रदोष व्रत।
13 जून 2026 शनिवार (मासिक शिव रात्रि)।
27 जून 2026 दिन शनिवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
29 जून 2026 दिन सोमवार स्नान दान व्रत पूर्णिमा।
*अमावस्या*
15 जून 2026 दिन सोमवार देव पितृ कार्य अमावस्या।
सोमवती अमावस्या।
*पंo वेदान्त अवस्थी*
आज का पंचांग 7 जून 2026
By Janhit TV
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