*मोटापे के जाल में उलझ रहे विंध्य के किशोर* —–एसएसएमसी रीवा के चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन में किए गए चौंकाने वाले खुलासे
*समशेर सिंह गहरवार रीवा* । श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय(एसएसएमसी) रीवा की मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MDRU) द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण अनुसंधान में पाया कि किशोरों को मोटापा अपने जाल में उलझा रहा है। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि रिसर्च की रिपोर्ट बता रही हैं। रिपोर्ट अनुसार विंध्य क्षेत्र के किशोरों में तेजी से बढ़ रहे मोटापे। प्रारंभिक हृदय-रोग जोखिम के जैविक, आनुवांशिक और जीवनशैली संबंधी कारकों का व्यापक विश्लेषण किया गया है। यह अध्ययन क्षेत्र का पहला वैज्ञानिक प्रयास है, जिसमें किशोर स्वास्थ्य पर मोटापे के प्रभावों का समग्र मूल्यांकन किया गया। अध्ययन में कुल 340 किशोर शामिल रहे । जिनमें से 170 मोटापाग्रस्त/अधिक वजन वाले, 170 सामान्य वजन वाले किशोर शामिल रहे। शोध का उद्देश्य रहा किशोरों में बढ़ते मोटापे से जुड़े आनुवंशिक, बायोमार्कर, हार्मोनल और जीवनशैली संबंधी कारकों की विस्तृत जांच करना । ताकि प्रारंभिक हृदय एवं चयापचय संबंधी रोगों के जोखिम का आकलन हो सके।
अध्ययन में 12 से 19 वर्ष आयु वर्ग के किशोर–किशोरियां शामिल रहे। शोध रीवा, सीधी एवं मऊगंज जिलों में संचालित किया गया।
*निजी विद्यालय मोटापा बढ़ाने में बन रहे सहायक*
विशेषज्ञों के अध्ययन में पाया गया कि निजी विद्यालयों के छात्रों में मोटापे की स्थिति सरकारी विद्यालयों की तुलना में अधिक है । क्योंकि वहां के छात्र व छात्राएं जंक फ़ूड और मीठे पेय पदार्थों का सेवन अधिक करते हैं। सामान्य वजन वाले किशोरों की तुलना में अधिक वजन/मोटापे वाले किशोरों में मोटापे के लक्षण स्पष्ट रूप से अधिक थे। लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में मोटापे की दर अधिक दर्ज की गई। वहीं रीवा जिले में मोटापे की प्रचलन दर अन्य जिलों की तुलना में अधिक पाई गई। मोटापा-ग्रस्त किशोरों में मोबाइल स्क्रीन-टाइम अत्यधिक था, जिससे शारीरिक गतिविधि में कमी देखी गई। किशोरों में आउटडोर खेलों की तुलना में इंडोर गेम्स (मोबाइल/वीडियो गेम) की ओर अधिक आकर्षण देखा गया। 13–15 वर्ष आयु समूह में मोटापे की दर सर्वाधिक पाई गई।
*यह है मोटापे के कारण*
मोटापा-ग्रस्त किशोरों में, ट्राइग्लिसराइड, कुल कोलेस्ट्रॉल,
एल.डी.एल का स्तर अधिक पाया गया। जबकि एच.डी.एल का स्तर कम था — यह प्रारंभिक हृदय रोग जोखिम का संकेत है। हार्मोनल परीक्षण में रेसिस्टिन, लेप्टिन, पी.ए.आई.-1
का स्तर मोटापाग्रस्त किशोरों में अधिक पाया गया। यह सूचक सूजन एवं मेटाबोलिक असंतुलन से जुड़े होते हैं। वहीं जीन विश्लेषण में निम्न जीनों में परिवर्तन पाए गए। एफ.टी.ओ जीन , एम.सी4.आर जीन, ए.डी.आई.पी.ओ.क्यू जीन , के.सी.एन.जे.11 जीन , सी.ए.पी.एन-10 जीन
इन जीनों में बदलाव मोटापा एवं मेटाबोलिक रोगों की आनुवंशिक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। साथ ही कमर-से-ऊँचाई अनुपात मोटापे का पता लगाने में बी.एम.आई से अधिक प्रभावी सूचक सिद्ध हुआ।शोध दल का मानना है कि यह अध्ययन भविष्य में आनुवांशिक अनुसंधान, नीति निर्माण, और रोकथाम कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा।
*यह करें मोटापा रोकने के उपाय*
चिकित्सा विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य नीति के तहत विद्यालयों और समाज के लिए मोटापा रोकने सुझाव दिए गए हैं जो काफी मददगार साबित होंगे।
: विद्यालयों में नियमित स्वास्थ्य एवं मेटाबॉलिक जांच। : पोषण एवं शारीरिक गतिविधि पर सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम।
: अभिभावकों और किशोरों के लिए स्वास्थ्य एवं जीवनशैली संबंधी परामर्श।
: स्क्रीन-टाइम कम करने और खेल-कूद बढ़ाने पर जोर।
**मोटापा इन बीमारियों का जन्मदाता*
अध्ययन के दौरान पाया गया कि मोटापे के चलते खासतौर पर बढ़ती उम्र के बच्चे उच्च रक्तचाप की चपेट में हैं। वहीं प्रारंभिक हृदय रोग, मधुमेह का जोखिम, फैटी लिवर, थकान, तनाव और आत्मविश्वास में कमी के जोख़िम सामने आये हैं।
*मोटापे के यह कारण आये सामने* : जंक-फूड/फास्ट-फूड का अधिक सेवन।
: मोबाइल/टीवी का अधिक उपयोग।
: कम शारीरिक सक्रियता ।
: अनुवांशिकता ।
*डॉक्टरों की राय अनुसार यह करें उपाय*
: घर का ताज़ा और संतुलित भोजन करें।
: रोज़ 45–60 मिनट शारीरिक व्यायाम करें।
: हर 6 महीने में स्वास्थ्य जांच।
: स्क्रीन-टाइम कम करें।
: परिवार और बच्चों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाएँ।
*समय पर पहचान से होगा बचाव*
“भारत में किशोरों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। आनुवांशिक और मेटाबोलिक मार्करों की समय पर पहचान से रोग जोखिम का प्रारंभिक अनुमान संभव है। वहीं प्रभावी रोकथाम रणनीतियाँ विकसित की जा सकती हैं। संभागीय स्तर पर बच्चों में बढ़ते मोटापे पर चले इस अध्ययन में डॉ. महेन्द्र तिलकर, डॉ. दीपक द्विवेदी, डॉ. संजय पांडे, डॉ. विभा सिन्हा। डॉ. स्वेता पांडे शामिल रहे । वहीं विवेक चमकेल एवं उमेश श्रीवास्तव ने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक, तकनीकी तथा अनुसंधानिक सहयोग प्रदान किया।
मोटापे के जाल में उलझ रहे विंध्य के किशोर !
By Janhit TV
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