*~ आज का पञ्चाङ्ग~*
*दिनांक – 20 अक्टूबर 2025*
*दिन – सोमवार*
*संवत्सर – सिद्धार्थ*
*विक्रम संवत् – 2082*
*शक संवत – 1947*
*कलि युगाब्द – 5127*
*अयन – दक्षिणायण*
*ऋतु – शरद*
*मास – कार्तिक*
*पक्ष – कृष्ण*
* तिथि – चतुर्दशी दोपहर 03:44 तत्पश्चात् अमावस्या*
*नक्षत्र – हस्त रात्रि 08:17 तक तत्पश्चात् चित्रा*
*योग – वैधृति रात्रि 02:35 अक्टूबर 21 तक तत्पश्चात् विष्कम्भ*
*राहुकाल – सुबह 07:30 से सुबह 09:00*
*सूर्योदय – 06:19*
*सूर्यास्त – 05:51*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*अग्निवास*
29+02+01=32÷4=00 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास*
29+29+5=63÷7 =00 श्मशान वासे।
*व्रत पर्व विवरण – नरक चतुर्दशी (तैलाभ्यंग स्नान), दीपावली, सोमवती अमावस्या (दोपहर 03:44 से 21 अक्टूबर सूर्योदय), लक्ष्मी पूजा, काली पूजा, शारदा पूजा, चोपड़ा पूजा, केदार गौरी व्रत, कमला जयंती*
विशेष – अमावस्या को स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
*जैविक घड़ी पर आधारित दिनचर्या*
*प्रातः ३ से ५ – (जीवनी शक्ति विशेषरूप से फेफडों में होती है)*
थोड़ा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना एवं प्राणायाम करना । शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिमान होता है । ब्राह्ममुहूर्त में उठनेवाले लोग बुद्धिमान व उत्साही होते हैं और सोते रहनेवालों का जीवन निस्तेज हो जाता है ।
*प्रातः ५ से ७ – (बड़ी आँत में)*
प्रातः जागरण से लेकर सुबह ७ बजे के बीच मल-त्याग एवं स्नान कर लेना चाहिए । सुबह ७ बजे के बाद जो मल-त्याग करते हैं उन्हें अनेक बीमारियाँ होती हैं ।
*सुबह ७ से ९ – (अमाशय यानी जठर में)*
इस समय (भोजन के २ घंटे पूर्व) दूध अथवा फलों का रस या कोई पेय पदार्थ ले सकते हैं ।
*९ से ११ – (अग्न्याशय व प्लीहा में)*
*यह समय भोजन के लिए उपयुक्त है । भोजन के बीच-बीच में गुनगुना पानी (अनुकूलता अनुसार) घूँट-घूँट पियें ।
*दोपहर ११ से १ – (हृदय में)*
दोपहर १२ बजे के आसपास मध्याङ्घ-संध्या करने का हमारी संस्कृति में विधान है । भोजन वर्जित ।
*दोपहर १ से ३ – (छोटी आँत में)*
भोजन के करीब २ घंटे बाद प्यास-अनुरूप पानी पीना चाहिए । इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है ।
*दोप. ३ से ५ – (मूत्राशय में)*
२-४ घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृत्ति होगी ।
*शाम ५ से ७ – (गुर्दे में)
इस समय हलका भोजन कर लेना चाहिए । सूर्यास्त के १० मिनट पहले से १० मिनट बाद तक (संध्याकाल में) भोजन न करें । शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते हैं ।
*रात्रि ७ से ९ – (मस्तिष्क में)*
इस समय मस्तिष्क विशेष रूप से सक्रिय रहता है । अतः प्रातःकाल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है ।
*रात्रि ९ से ११ – (रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जू में)*
इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है ।
*रात्रि ११ से १ – (पित्ताशय में)*
इस समय का जागरण पित्त-विकार, अनिद्रा, नेत्ररोग उत्पन्न करता है व बुढ़ापा जल्दी लाता है । इस समय नई कोशिकाएँ बनती हैं ।
*१ से ३ – (यकृत में)*
इस समय का जागरण यकृत (लीवर) व पाचन तंत्र को बिगाड़ देता है ।
ऋषियों व आयुर्वेदाचार्यों ने बिना भूख लगे भोजन करना वर्जित बताया है । अतः प्रातः एवं शाम के भोजन की मात्रा ऐसी रखें, जिससे ऊपर बताये समय में खुलकर भूख लगे ।
*शुभ दीपावली*
20 अक्टूबर 2025 दिन सोमवार को 03:46 बजे से मंगलवार 05:55 बजे तक अमावस्या हैं। अतः दीपावली 20 अक्टूबर 2025 को ही सभी लोग मनाए।
१. स्थिर कुंभ लग्न दोपहर 02:13 बजे से 03:44 बजे तक (व्यापार पूजन)।
२. वृष लग्न सायं 06:51 बजे से 08:48 बजे तक। (गृह पूजन)
३. सिंह लग्न रात्रि 01:19 बजे से 03:33 बजे तक। (मंत्र सिद्ध)
मुहूर्त शुभ हैं।
*पंचक*
31 अक्टूबर 2025 दिन शुक्रवार सुबह 06:48 बजे से 04 नवम्बर 2025 दिन मंगलवार दोपहर 12:35 बजे तक।
*एकादशी*
01 नवम्बर 2025 दिन शनिवार देव प्रबोधिनी (देव उठनी )एकादशी।
*प्रदोष*
03 नवम्बर 2025 दिन सोमवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
05 नवम्बर 2025 दिन बुधवार स्नान दान वृत पूर्णिमा।
*अमावस्या*
20 अक्टूबर 2025 दिन सोमवार प्रदोष व्यापिनी अमावस्या ( शुभ दीपावली)।
21 अक्टूबर 2025 दिन मंगलवार स्नान दान अमावस्या।
*पंo वेदान्त अवस्थी*



