*आज का पञ्चाङ्ग*
*दिनांक – 28 सितंबर 2026*
*दिन – सोमवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत 2083*
*शक संवत -1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – दक्षिणायन*
*ऋतु – शरद ॠतु*
*मास – आश्विन*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – द्वितीया शाम 07:13 तक तत्पश्चात तृतीया*
*नक्षत्र – रेवती सुबह 10:16 तक तत्पश्चात अश्विनी*
*योग – ध्रुव सुबह 08:53 तक तत्पश्चात व्याघात*
*राहुकाल – सुबह 07:30 से सुबह 09:00 तक*
*सूर्योदय – 06:03*
*सूर्यास्त – 05:57*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
*अग्निवास
17+02+01=20÷4=00 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास*
17+17+5=39÷7 =04 सभायाम वासे।
*व्रत पर्व विवरण – द्वितीया का श्राद्ध*
विशेष- द्वितीया को बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*ल
✨ चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)
✨ चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।
*भरणी श्राद्ध*
29 सितम्बर 2026 मंगलवार को भरणी नक्षत्र होने के कारण भरणी श्राद्ध है। भरणी नक्षत्र के देवता यमराज होने के कारण भरणी श्राद्ध का विशेष महत्व है। सामान्यतः आश्विन पितृपक्ष (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार भाद्रपद) में चतुर्थी अथवा पंचमी को ही भरणी नक्षत्र आता है। कहा जाता है लोक – लोकान्तर की यात्रा जन्म, मृ्त्यु व पुन: जन्म उत्पत्ति का कारकत्व भरणी नक्षत्र के पास है अतः भरणी नक्षत्र के दिन श्राद्ध करने से पितरों को सद्गति मिलती है। महाभरणी श्राद्ध में कहीं भी श्राद्ध किया जाए, फल गयाश्राद्ध के बराबर मिलता है। यह श्राद्ध सभी कर सकते हैं।
भरणी नक्षत्र में श्राद्ध करने से श्राद्धकर्ता को उत्तम आयु प्राप्त होती है।
✨ भरणी नक्षत्र में ब्राह्मण को काले तिल एवं गाय का दान करने से सद्गति प्राप्ति होती है व कष्ट कम होता है।
*अंगारकी-मंगलवारी चतुर्थी*
29 सितम्बर 2026 मंगलवार को शाम 05:09 से 30 सितम्बर सूर्योदय तक अंगारकी-मंगलवारी चतुर्थी है।
अंगारकी चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना …जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है…
> बिना नमक का भोजन करें।
> मंगल देव का मानसिक आह्वान करो
> चन्द्रमा में गणपति की भावना करके अर्घ्य दें
💵 कितना भी कर्ज़दार हो ..काम धंधे से बेरोजगार हो ..रोज़ी रोटी तो मिलेगी और कर्जे से छुटकारा मिलेगा |
*कोई कष्ट हो तो*
29 सितम्बर 2026 मंगलवार को संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय रात्रि 07:56)
हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों |
*छः मंत्र इस प्रकार हैं –*
*ॐ सुमुखाय नम:* : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।
*ॐ दुर्मुखाय नम:* : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये ।
*ॐ मोदाय नम:* : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।
*ॐ प्रमोदाय नम:* : प्रमोदाय; दूसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।
*ॐ अविघ्नाय नम:*
*ॐ विघ्नकरत्र्येय नमः*
*पंचक*
23 सितम्बर 2026 दिन बुधवार रात्रि 09:57 बजे से 28 सितम्बर 2026 दिन सोमवार सुबह 10:16 बजे तक।
*पंo वेदान्त अवस्थी*


