*आज का पञ्चाङ्ग*
*दिनांक – 19 अप्रैल 2026*
*दिन – रविवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत 2083*
*शक संवत -1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – उत्तरायण*
*ऋतु – वसंत ॠतु*
*मास – वैशाख*
*पक्ष – शुक्ल*
*तिथि – द्वितीया सुबह 10:49 तक तत्पश्चात तृतीया*
*नक्षत्र – भरणी सुबह 07:10 तक तत्पश्चात कृत्तिका*
*योग – आयुष्मान रात्रि 08:02 तक तत्पश्चात सौभाग्य*
*राहुकाल – शाम 04:30 से शाम 06:00 तक*
*सूर्योदय – 05:39*
*सूर्यास्त – 06:21*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे*
*अग्निवास*
02+01+01=4÷4=00 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास*
02+02+5=09÷7 =02 गौरी सन्निधौ वासे।
*व्रत पर्व विवरण- अक्षय तृतीया,पूरा दिन शुभ मुहूर्त),अखा तीज,त्रेता युगादि तिथि*
विशेष – द्वितीया को बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
*अक्षय तृतीया*
*19 अप्रैल 2026 रविवार को अक्षय तृतीया हैं।* ‘अक्षय’ शब्द का मतलब है- जिसका क्षय या नाश न हो। इस दिन किया हुआ जप, तप, ज्ञान तथा दान अक्षय फल देने वाला होता है अतः इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहते हैं। भविष्यपुराण, मत्स्यपुराण, पद्मपुराण, विष्णुधर्मोत्तर पुराण, स्कन्दपुराण में इस तिथि का विशेष उल्लेख है। इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका बड़ा ही श्रेष्ठ फल मिलता है। इस दिन सभी देवताओं व पित्तरों का पूजन किया जाता है। पित्तरों का श्राद्ध कर धर्मघट दान किए जाने का उल्लेख शास्त्रों में है। वैशाख मास भगवान विष्णु को अतिप्रिय है अतः विशेषतः विष्णु जी की पूजा करें।
स्कन्दपुराण के अनुसार, जो मनुष्य अक्षय तृतीया को सूर्योदय काल में प्रातः स्नान करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करके कथा सुनते हैं, वे मोक्ष के भागी होते हैं। जो उस दिन मधुसूदन की प्रसन्नता के लिए दान करते हैं, उनका वह पुण्यकर्म भगवान की आज्ञा से अक्षय फल देता है।
भविष्यपुराण के मध्यमपर्व में कहा गया है वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया में गंगाजी में स्नान करनेवाला सब पापों से मुक्त हो जाता है | वैशाख मास की तृतीया स्वाती नक्षत्र और माघ की तृतीया रोहिणीयुक्त हो तथा आश्विन तृतीया वृषराशि से युक्त हो तो उसमें जो भी दान दिया जाता है, वह अक्षय होता है | विशेषरूप से इनमें हविष्यान्न एवं मोदक देनेसे अधिक लाभ होता है तथा गुड़ और कर्पूर से युक्त जलदान करनेवाले की विद्वान् पुरुष अधिक प्रंशसा करते हैं, वह मनुष्य ब्रह्मलोक में पूजित होता है | यदि बुधवार और श्रवण से युक्त तृतीया हो तो उसमें स्नान और उपवास करनेसे अनंत फल प्राप्त होता हैं |
*अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं ।*
*तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया ।*
*उद्दिश्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यै: ।*
*तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव ।।*
अर्थ : भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठरसे कहते हैं, हे राजन इस तिथि पर किए गए दान व हवन का क्षय नहीं होता है; इसलिए हमारे ऋषि-मुनियोंने इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहा है । इस तिथि पर भगवानकी कृपादृष्टि पाने एवं पितरोंकी गतिके लिए की गई विधियां अक्षय-अविनाशी होती
19 अप्रैल 2026 दिन रविवार परशुराम जयंती।
20 अप्रैल 2026 दिन सोमवार अक्षय तृतीया।
*एकादशी*
27 अप्रैल 2026 दिन सोमवार मोहनी एकादशी।
*प्रदोष व्रत*
29 अप्रैल 2026 दिन बुधवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
01 मई 2026 दिन शुक्रवार स्नान दान वृत पूर्णिमा।
*पंo वेदान्त अवस्थी*
आज का पंचांग 19 अप्रैल 2026
By Janhit TV
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