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त्यौंथर में विकास के नाम पर लाखों का खेल!

By Janhit TV

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*विकास के नाम पर लाखों का खेल, एक ही काम के लिए बार-बार निकल गए पैसे, त्योंथर के सतपुरा उर्फ पड़िवार पंचायत में सरकारी राशि के बंदरबांट का गंभीर आरोप, कागजों में दिखा विकास, जमीन पर बदहाल सड़क*

*सतपुरा से मटियार और ऊसर गांव की ओर जाने वाली सड़क के रख-रखाव के नाम पर पिछले कई वर्षों से बार-बार लाखों रुपए खर्च, फिर भी सड़क की हालत आज भी बदहाल, वर्षों से पदस्थ सचिव की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, अधिकार विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र तिवारी ने लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप*

रीवा। जिले की त्योंथर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सतपुरा उर्फ पड़िवार में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के बंदरबांट का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां शासन की योजनाएं और विकास कार्य जमीनी हकीकत में कम, बल्कि सरकारी कागजों में ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। पंचायत में वर्षों से पदस्थ सचिव की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लाखों रुपए की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

*एक ही सड़क पर बार-बार खर्च हुए लाखों*
सबसे बड़ा मामला सतपुरा से मटियार और ऊसर गांव की ओर जाने वाली सड़क का है। बताया जा रहा है कि इस सड़क के रख-रखाव और मरम्मत के नाम पर पिछले कई वर्षों से बार-बार लाखों रुपए खर्च किए गए, लेकिन सड़क की हालत आज भी बदहाल है। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार कागजों में मरम्मत दिखा दी जाती है, पैसा निकल जाता है, लेकिन सड़क पर गड्ढे और कीचड़ जस के तस बने रहते हैं। बारिश में तो इस रास्ते से निकलना और भी मुश्किल हो जाता है।

*सचिव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप*
अधिकार विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र तिवारी ने पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सचिव लंबे समय से इसी ग्राम पंचायत में पदस्थ हैं और लगातार भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।
उनका आरोप है कि सचिव की मिलीभगत से ही विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग हो रहा है। योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच रहा है, बल्कि राशि का बड़ा हिस्सा कागजी खानापूर्ति में ही खत्म हो जा रहा है।

*जांच और कार्रवाई की उठी मांग*
इस मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि अगर सड़क के रख-रखाव के लिए निकले पैसों का सही हिसाब लगाया जाए तो लाखों रुपए के घोटाले का खुलासा हो सकता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और पंचायत में हुए कथित भ्रष्टाचार पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी कागजों में ही दबकर रह जाएगा।

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