एचआईवी और हेपेटाइटिस के संक्रमण की शुरुआती अवस्था में ही हो सकेगी पहचान, मरीजों को मिलेगा सुरक्षित रक्त*
*रीवा मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत शुरू हो रही नई प्रयोगशाला से रक्त की जांच पहले से अधिक उन्नत आणविक तकनीक से होगी, रक्त चढ़ाने से संक्रमण का खतरा होगा कम*
रीवा। रीवा मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत संजय गांधी अस्पताल में न्यूक्लिक एसिड परीक्षण यानी एनएटी प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। यह संभाग की पहली एनएटी प्रयोगशाला होगी। इसके शुरू होने से रक्तदान के रक्त की जांच पहले से अधिक उन्नत आणविक तकनीक से की जा सकेगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों की पहचान उन शुरुआती दिनों में भी संभव हो सकेगी, जब सामान्य जांच में संक्रमण का पता लगाना कठिन हो सकता है।
*क्या है एनएटी जांच और कैसे करेगी काम?*
एनएटी यानी न्यूक्लिक एसिड परीक्षण एक उन्नत आणविक जांच तकनीक है। इसमें वायरस के आनुवंशिक पदार्थ, यानी डीएनए या आरएनए की पहचान की जाती है। एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे विषाणुओं के संक्रमण का पता लगाने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। सामान्य जांच में वायरस के खिलाफ शरीर में बनने वाले एंटीबॉडी का इंतजार करना पड़ता है, जिसमें कई दिन लग जाते हैं। लेकिन एनएटी जांच सीधे वायरस को पकड़ लेती है, इसलिए संक्रमण की पहचान बहुत जल्दी हो जाती है।
*रक्त चढ़ाने से संक्रमण का खतरा होगा कम*
इस प्रयोगशाला का प्रमुख उद्देश्य रक्तदान के ब्लड की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करना है। रक्त केंद्रों में रक्तदाताओं से प्राप्त रक्त की विंडो पीरियड की जांच की जाती है। एनएटी तकनीक से जांच करने पर एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के संक्रमण का पता लगाने की क्षमता बढ़ जाती है। इस मॉडल के तहत रीवा मेडिकल कॉलेज की एनएटी प्रयोगशाला केंद्रीय जांच केंद्र के रूप में कार्य करेगी। जिसका काम चल रहा है।
*इनका कहना है*
संजय गांधी अस्पताल रीवा सहित क्षेत्र के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में गंभीर मरीजों को रक्त और रक्त के विभिन्न घटकों की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे मरीजों के लिए सुरक्षित रक्त की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। एनएटी प्रयोगशाला से जांच की व्यवस्था मजबूत होने पर रक्त चढ़ाने के दौरान संक्रमण फैलने की आशंका को कम करने में सहायता मिलेगी।
*डॉ. प्रियंक शर्मा, अधीक्षक एसजीएमएच*
*किन मरीजों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?*
रक्तदान के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को जीवन बचाने वाला रक्त उपलब्ध कराया जाता है। दुर्घटना में घायल मरीजों, प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव से जूझने वाली महिलाओं, गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों और बड़ी सर्जरी कराने वाले मरीजों को रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में रक्त की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। रक्तदाता के रक्त में मौजूद कुछ संक्रमण सामान्य जांच के बावजूद शुरुआती अवस्था में पकड़ में नहीं आ पाते। इसी चुनौती को दूर करने के लिए एनएटी तकनीक का उपयोग किया जाता है।
*रीवा संभाग के लिए बड़ी उपलब्धि*
रीवा में एनएटी लैब शुरू होने से पूरे विंध्य क्षेत्र के मरीजों को फायदा मिलेगा। अब तक इस तरह की उन्नत जांच के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता था या फिर जांच में समय लगता था। अब संजय गांधी अस्पताल में ही यह सुविधा मिलने से जांच जल्दी होगी और रक्त और भी सुरक्षित हो जाएगा।






