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आज का पंचांग 5 अगस्त 2026

By Janhit TV

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*~ आज का पञ्चाङ्ग ~*
*दिनांक – 05 अगस्त 2026*
*दिन – बुधवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत् – 2083*
*शक संवत – 1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – दक्षिणायण*
*ऋतु – वर्षा*
*मास – श्रावण*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – सप्तमी रात्रि 08:42 तक तत्पश्चात् अष्टमी*
*नक्षत्र – अश्विनी रात्रि 09:18 तक तत्पश्चात् भरणी*
*योग – शूल शाम 05:29 तक तत्पश्चात् गण्ड*
*राहुकाल – दोपहर 12:00 बजे से 01: 30बजे तक*
*सूर्योदय – 05:26*
*सूर्यास्त – 06:34*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*अग्निवास*
22+04+01=27÷4=03 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास
22+22+5=49÷7 =00 श्मशान वासे।
*व्रत पर्व विवरण -कालाष्टमी*
विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
* ब्रह्मगीतागौर्युद्यान वर्णन 3, सर्ग 264 *

हे रामजी! इसी प्रकार हम राजसी, तामसी और सात्त्विकी तीनों गुणों के रचे स्थानों को लाँघते लाँघते मथुरानगर के मार्ग आए जो सूधा था पर उसको छोड़कर वह टेढ़े मार्ग को चला तब मैंने कहा, हे साधो! सूधेमार्ग को छोड़कर तू टेढ़े मार्ग से क्यों चलता है।

उसने कहा, हे साधो! चला आ इस मार्ग में गौरी भगवती का स्थान है उनका दर्शन करते चलें- और मेरे सात भाई जो गौरी के स्थान पर इसी कामना को लेकर तप करते थे उनकी भी सुधि लें |

हे रामजी! जब हम उस मार्ग के सम्मुख चले तब आगे एक महाशून्य वन आया जो मानो शून्य आकाश था और महातमरूप था कि वहाँ वृक्ष🌳, पशु पक्षी और मनुष्य कोई दृष्टि न आता था | उस वन में पहुँचकर उसने मुझसे कहा, हे ब्राह्मण! इस स्थान में मैं आगे षट् मास रहा हूँ और मेरे सात भाई और थे उन्होंने भी यही कामना धार करके देवी का तप आरम्भ किया था चलो देखें |

वह महापवित्र स्थान है जिसके दर्शन किए से सम्पूर्ण पाप नष्ट💥 हो जाते हैं | तब मैंने कहा चलिए पवित्र स्थान को अवश्य देखना चाहिए |
हे रामजी! ऐसे विचार कर हम चले और जाते-जाते मरुस्थल🏜️ की तपी हुई पृथ्वी🌍 पर जा निकले तब वह ब्राह्मण देखकर गिर पड़ा और कहने लगा कि हा कष्ट-कष्ट कहाँ आन पड़े! तब तो मुझे भी भ्रम🌀 उदय हुआ कि यह क्या हुआ | निदान वह फिर उठा और दोनों आगे गए तो एक वृक्ष हमको दृष्टि आया कि उसके नीचे एक तपस्वी ध्यान🧘‍♂️ में स्थित बैठा था | हम उसके निकट गए और कहा,

हे मुनीश्वर! जाग जाग | जब हमने बहुत बार कहा तब उसने नेत्र👀 खोलकर हमको देखा और कहा तुम कौन हो? ऐसे कहकर फिर कहा बहुत आश्चर्य है कि यहाँ गौरी का स्थान था वह कहाँ गया और भी वृक्ष, बावलियाँ, कमल🌸 और सुन्दर स्थान और बड़े ऋषीश्वर और मुनीश्वरों के स्थान थे वह कहाँ गए?

हे साधो!यह क्या आश्चर्य हुआ सो तुम कहो? तब हमने कहा, हे मुनीश्वर! हम नहीं जानते हम तो अभी आए हैं, इसको तो तुम्हीं जानो | तब उसने कहा बड़ा आश्चर्य है |

हे रामजी! ऐसे कहकर वह फिर ध्यान में स्थित हो गया और व्यतीत वृत्तान्त का ध्यान करके देखने लगा | एक मुहूर्त⏳ पर्यन्त देखकर उसने फिर नेत्र खोलकर कहा कि बड़ा आश्चर्य हुआ है | तब हमने कहा, हे भगवन्! जो कुछ वृत्तान्त हुआ है सो कृपा करके हमसे कहो |

तब तपस्वी ने कहा, हे साधो! एक समय बागीश्वरी भवानी इस वन में आई और उसने रहने का एक स्थान बनाया जिसमें वह शिव की अर्धशरीर गौरी रही | उस स्थान के निकट बहुत सुन्दर कल्पवृक्ष, तमालवृक्ष, कदम्बवृक्ष इत्यादिक बहुत वृक्ष लगाए, कमलफूल आदि सर्व ऋतुओं के फूल लगाए और बावलियाँ और बगीचे अति रमणीय रचे जिनपर कोयल, भँवरे, तोते, मोर🦚, बगले आदि पक्षी विश्राम करने और शब्द🗣️ करने लगे |
उसके निकट ऋषीश्वरों, मुनीश्वरों और तपस्वियों की कुटियाँ इन्द्र के नन्दनवन सदृश थीं और निकट व गाँव की बस्ती बहुत हुई | हे साधो! यहाँ आठ ब्राह्मण तप के निमित्त आए थे और षट्मास यहाँ ही रहे |
👉10 अगस्त 2026 दिन सोमवार पूर्व दिशा गुरु उदय प्रातः 07:52 बजे।
*पंचक*
27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार दोपहर 01:35 बजे से 31 अगस्त 2026 दिन सोमवार रात्रि 03:24 बजे तक।
*एकादशी*
09 अगस्त 2026 दिन रविवार कामदा एकादशी।
23 अगस्त 2026 दिन रविवार पुत्रदा एकादशी।
*प्रदोष व्रत*
10 अगस्त 2026 दिन सोमवार प्रदोष व्रत।
11 अगस्त 2026 दिन मंगलवार मासिक शिवरात्रि।
25 अगस्त 2026 दिन मंगलवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार व्रत पूर्णिमा।
28 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार स्नान दान पूर्णिमा। रक्षा बंधन।
*अमावस्या*
12 अगस्त 2026 दिन बुधवार देव पितृ कार्य हरियाली अमावस्या।
*पंo वेदान्त अवस्थी*

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