*आज का पञ्चाङ्ग*
*दिनांक – 20 अक्टूबर 2026*
*दिन – मंगलवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत 2083*
*शक संवत -1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – दक्षिणायन*
*ऋतु – शरद ॠतु*
*मास – आश्विन*
*पक्ष – शुक्ल*
*तिथि – नवमी दोपहर 12:50 तक तत्पश्चात दशमी*
*नक्षत्र – श्रवण शाम 06:02 तक तत्पश्चात धनिष्ठा*
*योग – शूल रात्रि 12:50 तक तत्पश्चात गण्ड*
*राहुकाल – शाम 03:00 से शाम 04:30 तक*
*सूर्योदय – 06:20*
*सूर्यास्त – 05:40*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
*अग्निवास
09+02+01=12÷4=00 प्रथ्वी लोक में।
शिववास*
09+09+5=23÷7= गौरी सन्निधौ वासे।
*व्रत पर्व विवरण – दुर्गा विसर्जन,शारदीय नवरात्र समाप्त,दशहरा,विजयादशमी (पूरा दिन शुभ मुहूर्त),विजय मुहूर्त (दोपहर 02:07 से दोपहर 02:53 तक),(संकल्प शुभारंभ,नूतन कार्य,सीमोल्लंघन के लिए),अपराजिता-शमी वृक्ष-अस्त्र-शस्त्र-आयुध-वाहन पूजन,गुरू-पूजन*
विशेष- नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
✨ चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)
✨ चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।
*बिना मुहूर्त के मुहूर्त (दशहरा)*
⏩ *20 अक्टूबर 2026 मंगलवार को विजयादशमी (दशहरा) है।*
विजयादशमी का दिन बहुत महत्त्व का है और इस दिन सूर्यास्त के पूर्व से लेकर तारे निकलने तक का समय अर्थात् संध्या का समय बहुत उपयोगी है। रघु राजा ने इसी समय कुबेर पर चढ़ाई करने का संकेत कर दिया था कि ‘सोने की मुहरों की वृष्टि करो या तो फिर युद्ध करो।’ रामचन्द्रजी रावण के साथ युद्ध में इसी दिन विजयी हुए। ऐसे ही इस विजयादशमी के दिन अपने मन में जो रावण के विचार हैं काम, क्रोध, लोभ, मोह, भय, शोक, चिंता – इन अंदर के शत्रुओं को जीतना है और रोग, अशांति जैसे बाहर के शत्रुओं पर भी विजय पानी है। दशहरा यह खबर देता है।
अपनी सीमा के पार जाकर औरंगजेब के दाँत खट्टे करने के लिए शिवाजी ने दशहरे का दिन चुना था – बिना मुहूर्त के मुहूर्त ! (विजयादशमी का पूरा दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त है अर्थात इस दिन कोई भी शुभ कर्म करने के लिए पंचांग-शुद्धि या शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं रहती।) इसलिए दशहरे के दिन कोई भी वीरतापूर्ण काम करने वाला सफल होता है।
वरतंतु ऋषि का शिष्य कौत्स विद्याध्ययन समाप्त करके जब घर जाने लगा तो उसने अपने गुरुदेव से गुरूदक्षिणा के लिए निवेदन किया। तब गुरुदेव ने कहाः वत्स ! तुम्हारी सेवा ही मेरी गुरुदक्षिणा है। तुम्हारा कल्याण हो।’
परंतु कौत्स के बार-बार गुरुदक्षिणा के लिए आग्रह करते रहने पर ऋषि ने क्रुद्ध होकर कहाः ‘तुम गुरूदक्षिणा देना ही चाहते हो तो चौदह करोड़ स्वर्णमुद्राएँ लाकर दो।”
अब गुरुजी ने आज्ञा की है। इतनी स्वर्णमुद्राएँ और तो कोई देगा नहीं, रघु राजा के पास गये। रघु राजा ने इसी दिन को चुना और कुबेर को कहाः “या तो स्वर्णमुद्राओं की बरसात करो या तो युद्ध के लिए तैयार हो जाओ।” कुबेर ने शमी वृक्ष पर स्वर्णमुद्राओं की वृष्टि की। रघु राजा ने वह धन ऋषिकुमार को दिया लेकिन ऋषिकुमार ने अपने पास नहीं रखा, ऋषि को दिया।
विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष का पूजन किया जाता है और उसके पत्ते देकर एक-दूसरे को यह याद दिलाना होता है कि सुख बाँटने की चीज है और दुःख पैरों तले कुचलने की चीज है। धन-सम्पदा अकेले भोगने के लिए नहीं है। तेन त्यक्तेन भुंजीथा….। जो अकेले भोग करता है, धन-सम्पदा उसको ले डूबती है।
भोगवादी, दुनिया में विदेशी ‘अपने लिए – अपने लिए….’ करते हैं तो ‘व्हील चेयर’ पर और ‘हार्ट अटैक’ आदि कई बीमारियों से मरते हैं। अमेरिका में 58 प्रतिशत को सप्ताह में कभी-कभी अनिद्रा सताती है और 35 प्रतिशत को हर रोज अनिद्रा सताती है। भारत में अनिद्रा का प्रमाण 10 प्रतिशत भी नहीं है क्योंकि यहाँ सत्संग है और त्याग, परोपकार से जीने की कला है। यह भारत की महान संस्कृति का फल हमें मिल रहा है।
तो दशहरे की संध्या को भगवान को प्रीतिपूर्वक भजे और प्रार्थना करें कि ‘हे भगवान ! जो चीज सबसे श्रेष्ठ है उसी में हमारी रूचि करना।’ संकल्प करना कि’आज प्रतिज्ञा करते हैं कि हम ॐकार का जप करेंगे।’
‘ॐ’ का जप करने से देवदर्शन, लौकिक कामनाओं की पूर्ति, आध्यात्मिक चेतना में वृद्धि, साधक की ऊर्जा एवं क्षमता में वृद्धि और जीवन में दिव्यता तथा परमात्मा की प्राप्ति होती है।
*गुस्सा बहुत आता हो तो* गुस्सा बहुत आता हो तो धरती माता को अर्घ्य देना चाहिये कि माँ मै भी सहनशील बनूँ ….बात बात में गुस्सा न करूँ |
*शरद नवरात्रि*
19 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार
महाष्टमी, दुर्गा नवमी वृत।
20 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार
नवरात्रि वृत पारण 09:35 बजे तक।
*एकादशी*
22 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार पापांकुशा एकादशी व्रत सर्वे।
*प्रदोष व्रत*
23 अक्टूबर 2036 दिन शुक्रवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
25 अक्टूबर 2026 दिन रविवार वृत शरद पूर्णिमा।
26 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार स्नान दान पूर्णिमा।
*पंo वेदान्त अवस्थी*


