*~ आज का पञ्चाङ्ग~*
*दिनांक – 30 दिसम्बर 2025*
*दिन – मंगलवार*
*संवत्सर – सिद्धार्थ*
*विक्रम संवत 2082*
*शक संवत -1947*
*कलि युगाब्द – 5127*
*अयन – दक्षिणायन*
*ऋतु – शिशिर ॠतु*
*मास – पौष*
*पक्ष – शुक्ल*
*तिथि – दशमी सुबह 07:50 तक तत्पश्चात एकादशी*
*नक्षत्र – भरणी 31 दिसंबर रात्रि 03:58 तक तत्पश्चात कृत्तिका*
*योग – सिद्ध 31 दिसंबर रात्रि 01:02 तक तत्पश्चात साध्य*
*राहुकाल – शाम 03:00से शाम 04:30 तक*
*सूर्योदय – 06:43*
*सूर्यास्त – 05:17*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
*अग्निवास*
10+03+01=14÷4=02 पाताल लोक में।
*शिववास*
10+10+5=25÷7 =04 संभायाम वासे।
*व्रत पर्व विवरण – पुत्रदा एकादशी,(स्मार्त), एकादशी क्षय तिथि*
विशेष –
*पुत्रदा एकादशी*
30 दिसम्बर 2025 मंगलवार को सुबह 07:50 से 31 दिसम्बर प्रातः 05:00 तक एकदशी है।
विशेष – 30 दिसम्बर 2025 मंगलवार को पुत्रदा एकादशी (स्मार्त) एवं 31 दिसम्बर 2025 बुधवार को पुत्रदा एकादशी (भागवत)
निर्णयसिन्धु के प्रथम परिच्छेद में एकादशी के निर्णय में 18 भेद कहे गये हैं l
कालहेमाद्रि में मार्कण्डेयजी ने कहा है – जब बहुत वाक्य के विरोध से यदि संदेह हो जाय तो एकादशी का उपवास द्वादशी को ग्रहण करे और त्रयोदशी में पारणा करे ।
पद्म पुराण में आता है कि एकादशी व्रत के निर्णय में सब विवादों में द्वादशी को उपवास तथा त्रयोदशी में पारणा करे ।
*भक्ति बढाने हेतु*
जिसको अपनी भक्ति बढानी है …. भगवद्गीता का १२वाँ अध्याय पढ़के, भगवद्गीता हाथ में ही रखकर भगवान को प्रार्थना करे: “हे भगवान! भगवद्गीता का १२वाँ अध्याय भक्तियोग नामक अध्याय है। जिसका मैंने आज पाठ किया है। ऐसी कृपा करना प्रभु कि मेरी भक्ति बढ़ जाये। बस मेरी भक्ति बढ़ जाये दाता !! ” दिल से प्रार्थना करोगे न तो सचमुच भगवान के वचन गीता में हैं। और १२वें अध्याय को भक्तियोग नामक अध्याय कहते हैं। वो पाठ करके प्रार्थना की तो भगवान की, गुरु की कृपा क्यों नहीं बरसेगी!! भक्ति बढ़ेगी और वो ही भक्ति सब सुखों की खान है।
*एकादशी*
30 दिसम्बर 2025 दिन मंगलवार पुत्रदा एकादशी व्रत स्मार्त ( गृहस्थ)।
31 दिसम्बर 2025 दिन बुधवार दिन बुधवार पुत्रदा एकादशी व्रत वैष्णव।
*प्रदोष व्रत*
01 जनवरी 2026 दिन गुरुवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
02 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार वृत पूर्णिमा।
03 जनवरी 2026 दिन शनिवार स्नान दान पूर्णिमा।
*पंo वेदान्त अवस्थी*



