*आज का पञ्चाङ्ग~
*दिनांक – 21 अक्टूबर 2025*
*दिन – मंगलवार*
*संवत्सर – सिद्धार्थ*
*विक्रम संवत् – 2082*
*शक संवत – 1947*
*कलि युगाब्द – 5127*
*अयन – दक्षिणायण*
*ऋतु – शरद*
*मास – कार्तिक*
*पक्ष – कृष्ण*
* तिथि – अमावस्या शाम 05:54 तक तत्पश्चात् प्रतिपदा*
*नक्षत्र – चित्रा रात्रि 10:59 तक तत्पश्चात् स्वाती*
*योग – विष्कम्भ रात्रि 03:17 अक्टूबर 22 तक तत्पश्चात् प्रीति*
*राहुकाल – दोपहर 03:00 से शाम 04:30 तक*
*सूर्योदय – 06:20*
*सूर्यास्त – 05:40*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*अग्निवास*
30+03+01=34÷4=02 पाताल लोक में।
*शिववास*
30+30+5=65÷7 =02 गौरी सन्निधौ वासे।
व्रत पर्व विवरण – दीपावली, कार्तिक अमावस्या, दर्श अमावस्या, स्वामी रामतीर्थ जयंती एवं पुण्यतिथि
विशेष – अमावस्या को स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
*प्रकृति अनुसार विहार*
*वात प्रकृति*
त्याज्य : अति परिश्रम, अति व्यायाम, सतत अध्ययन, अधिक बोलना, अधिक पैदल चलना अथवा वाहनों में घूमना, तैरना, अति उपवास, रात्रि जागरण, भय, शोक, चिंता, मल-मूत्र आदि वेगों को रोकना, पश्चिम दिशा से आनेवाली हवा का सेवन ।
हितकर : सर्वांग मालिश (विशेषतः सिर व पैर की), कान-नाक में तेल डालना, आराम, सुखशीलता, निश्चिंतता व शांत निद्रा ।
*पित्त प्रकृति*
त्याज्यः तेज धूप में घूमना, अग्नि के निकट रहना, रात्रि जागरण, अति परिश्रम, अति उपवास, क्रोध, शोक, भय ।
हितकर : शीत, सुगंधित द्रव्यों (जैसे चंदन, अगरु) का लेप, शीत तेलों से मालिश ।
*कफ प्रकृति*
*त्याज्य : दिन में शयन, आरामप्रियता, आलस्य ।*
*हितकर : घूमना-फिरना, दौड़ना, तैरना, व्यायाम, आसन, प्राणायाम ।*
*सुख-शांतिप्रदायक ईशान-स्थल*
सुख-शांति और कल्याण चाहनेवाले बुद्धिमानों को अपने घर, दुकान या कार्यालय में ईशान-स्थल पर अपने इष्टदेव, सदगुरु का श्रीचित्र लगा के वहाँ धूप-दीप, मंत्रोच्चार तथा साधना-ध्यान पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए । यह विशेष सुख-शांतिदायक है ।
*ज्ञानार्जन में सहायता व सत्प्रेरणा हेतु*
विद्यार्थियों के लिए भी ईशान कोण बड़े महत्त्व का है । पूर्व एवं उत्तर दिशाएँ ज्ञानवर्धक दिशाएँ तथा ईशान-स्थल ज्ञानवर्धक स्थल है । जो विद्यार्थी ईशान-स्थल पर बैठ के पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पढ़ता है, उसे ज्ञानार्जन में विशेष सहायता मिलती है । पूर्व की ओर मुख करने से विशेष लाभ होता है । अध्ययन-कक्ष में सदगुरु या ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों के श्रीचित्र लगाने चाहिए, इससे सत्प्रेरणा मिलती है ।
*गोवर्धन पूजा*
21 अक्टूबर 2025 बुधवार
*भैया दूज*
22 अक्टूबर 2025 गुरुवार
*पंचक*
31 अक्टूबर 2025 दिन शुक्रवार सुबह 06:48 बजे से 04 नवम्बर 2025 दिन मंगलवार दोपहर 12:35 बजे तक।
*एकादशी*
01 नवम्बर 2025 दिन शनिवार देव प्रबोधिनी (देव उठनी )एकादशी।
*प्रदोष*
03 नवम्बर 2025 दिन सोमवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
05 नवम्बर 2025 दिन बुधवार स्नान दान वृत पूर्णिमा।
*अमावस्य
21 अक्टूबर 2025 दिन मंगलवार स्नान दान अमावस्या।
*पंo वेदान्त अवस्थी*



