*आज का पञ्चाङ्ग*
*दिनांक – 21 मार्च 2026*
*दिन – शनिवार*
*संवत्सर – सिद्धार्थ*
*विक्रम संवत 2083*
*शक संवत -1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – उत्तरायण*
*ऋतु – वसंत ॠतु*
*मास – चैत्र*
*पक्ष – शुक्ल*
*तिथि – तृतीया रात्रि 11:56 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
*नक्षत्र – अश्विनी रात्रि 12:37 तक तत्पश्चात भरणी*
*योग – इन्द्र शाम 07:01 तक तत्पश्चात वैधृति*
*राहुकाल – सुबह 09:00 से सुबह 10:30 तक*
*सूर्योदय – 06:02*
*सूर्यास्त – 05:58*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – पूर्व दिशा मे*
*अग्निवास*
03+07+01=11÷4=03 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास*
03+03+5=11÷7 =04 सभायाम वासे।
*व्रत पर्व विवरण- गौरी तृतीया,गणगौर*
विशेष – तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
*आर्थिक परेशानी हो तो*
स्कंद पुराण में लिखा है पौष मास की शुक्ल पक्ष की दसमी तिथि चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी यानि की (23 मार्च 2025 सोमवार) और सावन महीने की पूनम ये दिन लक्ष्मी पूजा के खास बताये गये हैं | इन दिनों में अगर कोई आर्थिक कष्ट से जूझ रहा है | पैसों की बहुत तंगी है घर में तो 12 मंत्र लक्ष्मी माता के बोलकर, शांत बैठकर मानसिक पूजा करे और उनको नमन करें तो उसको भगवती लक्ष्मी प्राप्त होती है, लाभ होता है, घर में लक्ष्मी स्थायी हो जाती हैं | उसके घर से आर्थिक समस्याए धीरे धीरे किनारा करती है | बारह मंत्र इसप्रकार हैं –
*ॐ ऐश्वर्यै नम:*
*ॐ कमलायै नम:*
*ॐ लक्ष्मयै नम:*
*ॐ चलायै नम:*
*ॐ भुत्यै नम:*
*ॐ हरिप्रियायै नम:*
*ॐ पद्मायै नम:*
*ॐ पद्माल्यायै नम:*
*ॐ संपत्यै नम:*
*ॐ ऊच्चयै नम:*
*ॐ श्रीयै नम:*
*ॐ पद्मधारिन्यै नम:*
*सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्ति प्रदायिनि | मंत्रपूर्ते सदा देवि महालक्ष्मी नमोस्तुते ||*
*द्वादश एतानि नामानि लक्ष्मी संपूज्यय पठेत | स्थिरा लक्ष्मीर्भवेतस्य पुत्रदाराबिभिस: ||*
उसके घर में लक्ष्मी स्थिर हो जाती है | जो इन बारह नामों को इन दिनों में पठन करें |
विशेष ~ 23 मार्च 2026 सोमवार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है ।
*चैत्र नवरात्रि*
नवरात्रि के चौथे दिन यानी चतुर्थी तिथि को माता दुर्गा को मालपुआ का भोग लगाएं ।इससे समस्याओं का अंत होता है ।
*चैत्र नवरात्रि*
*रोग, शोक दूर करती हैं मां कूष्मांडा*
नवरात्रि की चतुर्थी तिथि की प्रमुख देवी मां कूष्मांडा हैं। देवी कूष्मांडा रोगों को तुरंत नष्ट करने वाली हैं। इनकी भक्ति करने वाले श्रद्धालु को धन-धान्य और संपदा के साथ-साथ अच्छा स्वास्थ्य भी प्राप्त होता है। मां दुर्गा के इस चतुर्थ रूप कूष्मांडा ने अपने उदर से अंड अर्थात ब्रह्मांड को उत्पन्न किया। इसी वजह से दुर्गा के इस स्वरूप का नाम कूष्मांडा पड़ा।
मां कूष्मांडा के पूजन से हमारे शरीर का अनाहत चक्रजागृत होता है। इनकी उपासना से हमारे समस्त रोग व शोक दूर हो जाते हैं। साथ ही, भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य के साथ-साथ सभी भौतिक और आध्यात्मिक सुख भी प्राप्त होते हैं।
*नवरात्रि*
26 मार्च 2026 दिन गुरुवार दुर्गाष्टमी एवं श्री राम नवमी पूजा।
27 मार्च 2026 दिन शुक्रवार नवमी पूजन, हवन एवं कन्या भोज।
28 मार्च 2026 दिन शनिवार श्री धर्मराज दशमी।
*एकादशी*
29 मार्च 2026 दिन रविवार कामदा एकादशी।
*प्रदोष व्रत*
30 मार्च 2026 दिन सोमवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
01 अप्रैल 2026 दिन बुधवार वृत पूर्णिमा।
02 अप्रैल 2026 दिन गुरुवार स्नान दान पूर्णिमा।
*पंo वेदान्त अवस्थी
आज का पंचांग 21 मार्च 2026
By Janhit TV
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