*~ आज का पञ्चाङ्ग~*
*दिनांक – 16 अक्टूबर 2025*
*दिन – गुरूवार*
*संवत्सर – सिद्धार्थ*
*विक्रम संवत 2082*
*शक संवत -1947*
*कलि युगाब्द – 5127*
*अयन – दक्षिणायन*
*ऋतु – शरद ॠतु*
*मास – कार्तिक*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – दशमी सुबह 10:35 तक तत्पश्चात एकादशी*
*नक्षत्र – अश्लेशा दोपहर 12:42 तक तत्पश्चात मघा*
*योग – शुभ 17 अक्टूबर रात्रि 02:11 तक तत्पश्चात शुक्ल*
*राहुकाल – दोपहर 01:30 से शाम 03:00*
*सूर्योदय – 06:16*
*सूर्यास्त – 05:44*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे*
*अग्निवास*
25+05+01=31÷4=03 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास*
25+25+5=55÷7 =06 क्रीड़ा याम वासे।
*व्रत पर्व विवरण –
*विशेष
*संक्रांति*
*17 अक्टूबर 2025 शुक्रवार को संक्रांति (पुण्यकाल : सुबह 10:02 से शाम 05:46 तक)*
इसमें किया गया जप, ध्यान, दान व पुण्यकर्म अक्षय होता है ।
*एकादशी व्रत के लाभ*
16 अक्टूबर 2025 गुरूवार को सुबह 10:35 से 17 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह 11:12 तक एकादशी है।
*विशेष – 17 अक्टूबर, शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।*
जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।
जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।
एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।
धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।
कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।
परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।
*एकादशी के दिन करने योग्य*
एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l
*एकादशी के दिन ये सावधानी रहे*
महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है।
18 अक्टूबर 2025 दिन शनिवार धनतेरस।
19 अक्टूबर 2025 दिन रविवार नरक चतुर्दशी।
20 अक्टूबर 2025 दिन सोमवार शुभ दीपावली।
*पंचक*
31 अक्टूबर 2025 दिन शुक्रवार सुबह 06:48 बजे से 04 नवम्बर 2025 दिन मंगलवार दोपहर 12:35 बजे तक।
*एकादशी*
17 अक्टूबर 2025 दिन शुक्रवार रमा एकादशी व्रत सर्वे।
01 नवम्बर 2025 दिन शनिवार देव प्रबोधिनी (देव उठनी )एकादशी।
*प्रदोष*
18 अक्टूबर 2025 दिन शनिवार प्रदोष व्रत (मासिक शिव रात्रि)।
03 नवम्बर 2025 दिन सोमवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
05 नवम्बर 2025 दिन बुधवार स्नान दान वृत पूर्णिमा।
*अमावस्या*
20 अक्टूबर 2025 दिन सोमवार प्रदोष व्यापिनी अमावस्या ( शुभ दीपावली)।
21 अक्टूबर 2025 दिन मंगलवार स्नान दान अमावस्या।
*पंo वेदान्त अवस्थी*



