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आज का पंचांग 15 नवंबर 2025

By Janhit TV

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*आज का पञ्चाङ्ग*
दिनांक – 15 नवम्बर 2025
दिन – शनिवार
संवत्सर – सिद्धार्थ
विक्रम संवत् – 2082
शक संवत– 1947
कलि युगाब्द – 5127
अयन – दक्षिणायण
ऋतु – शरद
मास – मार्गशीर्ष
पक्ष – कृष्ण
तिथि – एकादशी रात्रि 02:37 नवम्बर 16 तक तत्पश्चात् द्वादशी
नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी रात्रि 11:34 तक तत्पश्चात् हस्त
योग – विष्कम्भ पूर्ण रात्रि तक
राहुकाल – सुबह 09:00 से सुबह 10:30 तक
सूर्योदय – 06:36
सूर्यास्त – 05:24
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
दिशा शूल – पूर्व दिशा में
*अग्निवास*
26+07+01=34÷4=02 पाताल लोक में।
*शिववास*
26+26+5=57÷7 =01 कैलाश वासे।
व्रत पर्व विवरण – उत्पत्ति एकादशी,
विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)

*एकदाशी में क्या करें, क्या ना करें ?*

1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।

2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें ।
हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l

*राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।।सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l
3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जाप करना चाहिए ।

4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।

5. एकदशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।
6. व्रत के ( दशमी, एकादशी और द्वादशी ) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – का सेवन न करें ।

7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए ।

8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए ।

9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए ।

10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है ।

11. इस दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए ।

12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें ।

13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) ।
14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।
इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है ।
*पंचक*
27 नवम्बर 2025 दिन गुरुवार दोपहर 02:07 बजे से 01 दिसम्बर 2025 दिन सोमवार रात्रि 11:18 बजे तक।
*एकादशी*
15 नवम्बर 2025 दिन शनिवार उत्पन्ना एकादशी व्रत सर्वे।
01 दिसम्बर 2025 दिन सोमवार मोक्षदा एकादशी व्रत सर्वे।
*प्रदोष*
17 नवम्बर 2025 दिन सोमवार प्रदोष व्रत।
18 नवम्बर 2025 दिन मंगलवार मासिक शिव रात्रि।
02 दिसम्बर 2025 दिन मंगलवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
04 दिसम्बर 2025 दिन गुरुवार स्नान दान वृत पूर्णिमा।
*अमावस्या*
19 नवम्बर 2025 दिन बुधवार पितृकार्ये अमावस्या।
20 नवम्बर 2025 दिन गुरुवार स्नान दान अमावस्या।
*पंo वेदान्त अवस्थी*

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