*~ आज का पञ्चाङ्ग ~*
*दिनांक – 09 दिसम्बर 2025*
*दिन – मंगलवार*
*संवत्सर – सिद्धार्थ*
*विक्रम संवत 2082*
*शक संवत -1947*
*कलि युगाब्द – 5127*
*अयन – दक्षिणायन*
*ऋतु – हेमंत ॠतु*
*मास – पौष मार्गशीर्ष*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – पंचमी दोपहर 02:28 तक तत्पश्चात षष्ठी*
*नक्षत्र – अश्लेशा 10 दिसंबर रात्रि 02:22 तक तत्पश्चात मघा*
*योग – इन्द्र दोपहर 02:33 तक तत्पश्चात वैधृति*
*राहुकाल – शाम 03:00 से शाम 04:30 तक*
*सूर्योदय – 06:47*
*सूर्यास्त – 05:13*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
*अग्निवास*
20+03+01=24÷4=00 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास*
20+20+5=45÷7 =03 वृषारूढ़ा वासे।
व्रत पर्व विवरण-
विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
*तुलसी महिमा*
*25 दिसम्बर को तुलसी पूजन दिवस है ।*
तुलसी के निकट जिस मंत्र-स्तोत्र आदि का जप-पाठ किया जाता है, वह सब अनंत गुना फल देनेवाला होता है |
प्रेत, पिशाच, ब्रह्मराक्षस, भूत, दैत्य आदि सब तुलसी के पौधे से दूर भागते है |
ब्रह्महत्या आदि ताप तथा पाप और बुरे विचार से उत्पन्न होनेवाले रोग तुलसी के सामीप्य एवं सेवन से नष्ट हो जाते हैं |
तुलसी का पूजन, रोपण व धारण पाप को जलाता है और स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदायक है |
श्राद्ध और यज्ञ आदि कार्यों में तुलसी का एक पत्ता भी महान पुण्य देनेवाला है |
जो चोटी में तुलसी स्थापित करके प्राणों का परित्याग करता है, वह पापराशि से मुक्त हो जाता है |
तुलसी के नाम-उच्चारण से मनुष्य के पाप नष्ट हो जाते हैं तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है |
तुलसी ग्रहण करके मनुष्य पातकों से मुक्त हो जाता है |
तुलसी पत्ते से टपकता हुआ जल जो अपने सिर पर धारण करता है, उसे गंगास्नान और १० गोदान का फल प्राप्त होता है |
पद्मपुराण (ऋषिप्रसाद – अक्टूबर २०१४ से )
*घर में सुख-शांति के लिए*
घर में सुख-शांति, कामधंधे में स्थिति चाहिये तो पर्वों के दिनों में तुलसी के १०८ परिक्रमा करें |
*तुलसी मंत्र*
*तुलसी माता पर जल चढ़ाते हुए इस मंत्र को बोलें*
*महाप्रसाद जननी सर्वसौभाग्यवर्धिनी*
*आधि व्याधि जरा मुक्तं तुलसी त्वाम् नमोस्तुते*
*इस मंत्र का अर्थ है*
हे भक्ति का प्रसाद देने वाली माँ! सौभाग्य बढ़ाने वाली, मन के दुःख, और शरीर के रोग दूर करने वाली तुलसी माता को हम प्रणाम करते है |
*पंo वेदान्त अवस्थी*



