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आज का पंचांग 22 अगस्त 2025

By Janhit TV

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~ *आज का पञ्चाङ्ग* ~
*दिनांक – 22 अगस्त 2025*
*दिन – शुक्रवार*
*संवत्सर – सिद्धार्थ*
*विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
*शक संवत – 1947*
*कलि युगाब्द – 5127*
*अयन – दक्षिणायन*
*ऋतु – वर्षा ॠतु*
*मास – भाद्रपद ( गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार श्रावण)*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – चतुर्दशी सुबह 11:55 तक तत्पश्चात अमावस्या*
*नक्षत्र – अश्लेशा रात्रि 12:16 तक तत्पश्चात मघा*
*योग – वरीयान दोपहर 02:35 तक तत्पश्चात परिघ*
*राहुकाल – सुबह 10:34 से दोपहर 12:11 तक*
*सूर्योदय – 05:37*
*सूर्यास्त – 06:23*
_स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे*
*अग्निवास*
29+06+01=36÷4=00 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास*
29+29+5=63÷7 =00 श्मशान वासे।
*व्रत पर्व विवरण – दर्श अमावस्या, पीठोरी अमावस्या*
विशेष – चतुर्दशी व अमावस्या एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)

*शरद ऋतु में कैसे करें स्वास्थ्य की रक्षा*
*शरद ऋतु में ध्यान देने योग्य महत्त्वपूर्ण बातें :*
१] रोगाणां शारदी माता | रोगों की माता है यह शरद ऋतु | वर्षा ऋतु में संचित पित्त इस ऋतु में प्रकुपित होता है | इसलिए शरद पूर्णिमा की चाँदनी में उस पित्त का शमन किया जाता हैं |
इस मौसम में खीर खानी चाहिए | खीर को भोजनों में ‘रसराज’ कहा गया है | सीता माता जब अशोक वाटिका में नजरकैद थीं तो रावण का भेजा हुआ भोजन तो क्या खायेंगी, तब इंद्र देवता खीर भेजते थे और सीताजी वह खाती थी |
२] इस ऋतु में दूध, घी, चावल, लौकी, पेठा, अंगूर, किशमिश, काली द्राक्ष तथा मौसम के अनुसार फल आदि स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं |
गुलकंद खाने से भी पित्तशामक शक्ति पैदा होती है | रात को (सोने से कम-से-कम घंटाभर पहले ) मीठा दूध घूँट – घूँट मुँह में बार-बार घुमाते हुए पियें | दिन में ७ – ८ गिलास पानी शरीर में जाय, यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा है |
३] खट्टे, खारे, तीखे पदार्थ व भारी खुराक का त्याग करना बुद्धिमत्ता है | तली हुई चीजें, अचारवाली खुराक, रात को देरी से खाना अथवा बासी खुराक खाना और देरी से सोना स्वास्थ्य के लिए खतरा है क्योंकि शरद ऋतु रोगों की माता है | कोई भी छोटा-मोटा रोग होगा तो इस ऋतु में भडकेगा इसलिए उसको बिठा दो |
४] शरद ऋतु में कड़वा रस बहुत उपयोगी है | कभी करेला चबा लिया, कभी नीम के १०-१२ पत्ते चबा लिये | यह कड़वा रस खाने में तो अच्छा नहीं लगता लेकिन भूख लगाता है और भोजन को पचा देता है |
५] पाचन ठीक करने का एक मंत्र भी है :
*अगस्त्यं कुम्भकर्ण च शनिं च वडवानलम् |*
*आहारपरिपाकार्थ स्मरेद् भीमं च पंचमम् ||*
यह मंत्र पढ़के पेट पर हाथ घुमाने से भी पाचनतंत्र ठीक रहता हैं |
६] बार-बार मुँह चलाना (खाना) ठीक नहीं, दिन में दो बार भोजन करें | और वह सात्त्विक व सुपाच्य हो | भोजन शांत व प्रसन्न होकर करें | भगवन्नाम से आप्लावित ( तर, नम ) निगाह डालकर भोजन को प्रसाद बना के खायें |
७] ५० साल के बाद स्वास्थ्य जरा नपा-तुला रहता है, रोगप्रतिकारक शक्तिदबी रहती है | इस समय नमक, शक्कर और घी-तेल पाचन की स्थिति पर ध्यान देते हुए नपा-तुला खायें, थोडा भी ज्यादा खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है |
८] कइयों की आँखें जलती होंगी, लाल हो जाती होंगी | कइयों को सिरदर्द होता होगा | तो एक –एक घूँट पानी मुँह में लेकर अंदर गरारा (कुल्ला) करता रहे और चाँदी का बर्तन मिले अथवा जो भी मिल जाय, उसमें पानी भर के आँख डुबा के पटपटाता जाय | मुँह में दुबारा पानी भर के फिर दूसरी आँख डुबा के ऐसा करें | फिर इसे कुछ बार दोहराये | इससे आँख व सिर की गर्मी निकलेगी | सिरदर्द और आँखों की जलन में आराम होगा व नेत्रज्योति में वृद्धि होगी |
९] अगर स्वस्थ रहना है और सात्त्विक सुख लेना है तो सुर्योदय के पहले उठना न भूलें | आरोग्य और प्रसन्नता की कुंजी है सुबह-सुबह वायु-सेवन करना | सूरज की किरणें नही निकली हों और चन्द्रमा की किरणें शांत हो गयी हों उस समय वातावरण में सात्तिवकता का प्रभाव होता है | वैज्ञानिक भाषा में कहें तो इस समय ओजोन वायु खूब मात्रा में होती है और वातावरण में ऋणायनों का प्रमाण अधिक होता है | वह स्वास्थ्यप्रद होती है | सुबह के समय की जो हवा है वह मरीज को भी थोड़ी सांत्वना देती है |
*हरतालिका*
26 अगस्त 2025दिन मंगलवार हरतालिकातीज वृत।
27 अगस्त 2025 दिन बुधवार गणेश चतुर्थी।
*पंचक*
06 सितम्बर 2025 दिन शनिवार दोपहर 11:21 बजे से 10 सितम्बर 2025 दिन साय 04:03 बजे तक।
*एकादशी*
03 सितम्बर 2025 बुधवार पद्मा(कर्मा)एकादशी व्रत गृहस्थ।
04 सितम्बर 2025 दिन गुरुवार पद्मा(कर्मा)एकादशी वृत वैष्णव।
*प्रदोष*
05 सितम्बर 2025 दिन शुक्रवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
06 सितम्बर 2025 दिन शनिवार अनंत चतुर्दशी।
07 सितम्बर 2025 दिन रविवार स्नान दान वृत पूर्णिमा। श्राद्ध प्रारंभ।
*अमावस्या*
22 अगस्त 2025 दिन शुक्रवार पितृ कार्य अमावस्या।
23 अगस्त 2025 दिन शनिवार देव कार्य अमावस्या।
*पंo वेदान्त अवस्थी*

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