*आज का पञ्चाङ्ग*
*दिनांक – 18 फरवरी 2026*
*दिन – बुधवार*
*संवत्सर – सिद्धार्थ*
*विक्रम संवत 2082*
*शक संवत -1947*
*कलि युगाब्द –5127*
*अयन – उत्तरायण*
*ऋतु – शिशिर ॠतु*
*मास – फाल्गुन*
*पक्ष – शुक्ल*
*तिथि – प्रतिपदा शाम 04:57 तक तत्पश्चात द्वितीया*
*नक्षत्र – शतभिशा रात्रि 09:16 तक तत्पश्चात पूर्वभाद्रपद*
*योग – शिव रात्रि 10:45 तक तत्पश्चात सिद्ध*
*राहुकाल – दोपहर 12:00 से दोपहर 01:30 तक*
*सूर्योदय – 06:23*
*सूर्यास्त – 05:37*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
*अग्निवास*
01+04+01=06÷4=02 पाताल लोक में।
*शिववास*
01+01+5=07÷7 =00 श्मशान वासे।
*व्रत पर्व विवरण- चंद्र-दर्शन ( शाम 06:24 से रात्रि 07:15 तक),*
विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
*वसंत ऋतु का संदेश*
*खान-पान का ध्यान विशेष-वसंत ऋतु का है संदेश*
🍃 ऋतुराज वसंत शीत व उष्णता का संधिकाल है | इसमें शीत ऋतु का संचित कफ सूर्य की संतप्त किरणों से पिघलने लगता है, जिससे जठराग्नि मंद हो जाती है और सर्दी-खाँसी, उल्टी-दस्त आदि अनेक रोग उत्पन्न होने लगते हैं | अतः इस समय आहार-विहार की विशेष सावधानी रखनी चाहिए |
आहार : इस ऋतु में देर से पचनेवाले, शीतल पदार्थ, दिन में सोना, स्निग्ध अर्थात घी-तेल में बने तथा अम्ल व रसप्रधान पदार्थो का सेवन न करें क्योंकि ये सभी कफ वर्धक हैं | (अष्टांगहृदय ३.२६)
वसंत में मिठाई, सूखा मेवा, खट्टे-मीठे फल, दही, आईसक्रीम तथा गरिष्ठ भोजन का सेवन वर्जित है | इन दिनों में शीघ्र पचनेवाले, अल्प तेल व घी में बने, तीखे, कड़वे, कसैले, उष्ण पदार्थों जैसे- लाई, मुरमुरे, जौ, भुने हुए चने, पुराना गेहूँ, चना, मूँग , अदरक, सौंठ, अजवायन, हल्दी, पीपरामूल, काली मिर्च, हींग, सूरन, सहजन की फली, करेला, मेथी, ताजी मूली, तिल का तेल, शहद, गौमूत्र आदि कफनाशकपदार्थों का सेवन करें | भरपेट भोजन ना करें | नमक का कम उपयोग तथा १५ दिनों में एक कड़क उपवास स्वास्थ्य के लिए हितकारी है | उपवास के नाम पर पेट में फलाहार ठूँसना बुद्धिमानी नही है |
➡ विहार : ऋतु-परिवर्तन से शरीर में उत्पन्न भारीपन तथा आलस्य को दूर करने के लिए सूर्योदय से पूर्व उठना, व्यायाम, दौड़, तेज चलना, आसन तथा प्राणायाम (विशेषकर सूर्यभेदी) लाभदायी है | तिल के तेल से मालिश कर सप्तधान उबटन से स्नान करना स्वास्थ्य की कुंजी है |
*वसंत ऋतु के विशेष प्रयोग*
१५ से २० नीम के पत्त ङतथा २-३ काली मिर्च १५-२० दिन चबाकर खाने से वर्षभर चर्मरोग, ज्वर, रक्तविकार आदि रोगों से रक्षा होती है |
अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े कर उसमें नींबू का रस और थोडा नमक मिला के सेवन करने से मंदाग्नि दूर होती है |
५ ग्राम रात को भिगोयी हुई मेथी सुबह चबाकर पानी पीने से पेट की गैस दूर होती है |
रीठे का छिलका पानी में पीसकर २-२ बूँद नाक में टपकाने से आधासीसी (सिर) का दर्द दूर होता है |
१० ग्राम घी में १५ ग्राम गुड़ मिलाकर लेने से सूखी खाँसी में राहत मिलती है |
१० ग्राम शहद, २ ग्राम सोंठ व १ ग्राम काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम चाटने से बलगमी खाँसी दूर होती है |
सावधानी : मुँह में कफ आने पर उसे तुरंत बाहर निकाल दें | कफ की तकलीफ में अंग्रेजी दवाइयाँ लेने से कफ सूख जाता है, जो भविष्य में टी.बी., दमा, कैंसर जैसे गम्भीर रोग उत्पन्न कर सकता है | अतः कफ बढ़ने पर ? जकरणी जलनेति का प्रयोग करें |
19 फरवरी 2026 दिन गुरुवार फुलेरा दूज।
*पंचक*
17 फरवरी 2026 दिन मंगलवार 09:06 बजे से 21 फरवरी 2026 दिन शनिवार शाम 07:07 बजे तक।
*एकादशी*
27 फरवरी 2026 दिन शुक्रवार आमलकी एकादशी व्रत सर्वे।
*प्रदोष व्रत*
01 मार्च 2016 दिन रविवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
02 मार्च 2026 दिन सोमवार व्रत पूर्णिमा होलिका दहन।
03 मार्च 2026 चन्द्र ग्रहण।
*पंo वेदान्त अवस्थी*
आज का पंचांग 18 फरवरी 2026
By Janhit TV
Published on:


