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कष्टदायक व दीर्घकालिक रोग भगंदर (फिस्टुला) का आयुर्वेदिक उपचार से पाये मुक्ति: डॉक्टर दीपक

By Janhit TV

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**कष्टदायक व दीर्घकालिक रोग है भगंदर (फिस्टुला) , आयुर्वेदिक उपचार से पाये मुक्ति : डॉक्टर दीपक*
रीवा। आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में भगंदर एक कष्टदायक और दीर्घकालिक रोग माना जा रहा है। जिसे आधुनिक चिकित्सा में एनल फिस्टुला (Anal Fistula) कहा जाता है। यह रोग गुदा (मलद्वार) के आसपास फोड़े (एब्सेस) के फटने या लंबे समय तक न भरने के कारण बनता है। इसमें गुदा के भीतर और बाहर की त्वचा के बीच एक असामान्य नली (मार्ग) बन जाती है, जिससे बार-बार मवाद या खून निकलता रहता है। जिसका कारगर उपचार आयुर्वेद चिकित्सा में है, कुछ ही महीने की दवायें रोग से छुटकारा दिला सकती हैं। आयुर्वेद चिकित्सा एवं शिक्षा महाविद्यालय निपनिया, रीवा के प्राचार्य डॉ दीपक कुलश्रेष्ठ ने रोग के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि
गुदा के पास बार-बार फोड़ा बनना, मवाद या दुर्गंधयुक्त स्राव, दर्द, जलन और सूजन बैठने या मलत्याग में कष्ट, कभी-कभी बुखार और कमजोरी आदि लक्षणों में शामिल हैं।
आयुर्वेद के अनुसार भगंदर एक दुष्ट व्रण है। चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट जैसे आचार्यों ने इसे गंभीर रोग माना है। आयुर्वेद में इसके कारण त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) का असंतुलन, विशेषकर वात-पित्त दोष की प्रधानता बताई गई है। गलत आहार-विहार, कब्ज, अत्यधिक मसालेदार भोजन, देर तक बैठना और संक्रमण इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।
*आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से निदान*
निपनिया आयुर्वेद महाविद्यालय रीवा में भगंदर का उपचार चरणबद्ध और समग्र रूप से किया जाता है।
*क्षारसूत्र चिकित्सा**
यह आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध और प्रभावी पद्धति है। इसमें औषधीय क्षार से लेपित सूत (धागा) को भगंदर की नली में डाला जाता है। यह धीरे-धीरे रोगग्रस्त ऊतक को काटता और मार्ग को भरता है।
लाभ: कम रक्तस्राव कम पुनरावृत्ति (दोबारा होने की संभावना कम) सर्जरी की तुलना में सुरक्षित विधि है।
*औषधीय उपचार**
गुग्गुलु, त्रिफला, नीम, हरिद्रा जैसी औषधियाँ सूजन और संक्रमण कम करने में सहायक मानी जाती हैं। आंतरिक शोधन हेतु त्रिफला चूर्ण या अन्य सौम्य विरेचक दिए जाते हैं (वैद्य की सलाह से)। *स्थानीय उपचार**
औषधीय तेलों से गुदा क्षेत्र की सफाई
बैठकी स्नान (सिट्ज बाथ) – गुनगुने पानी में औषधि मिलाकर उपचार किया जाता है।
*आहार-विहार*
रेशेदार, सुपाच्य भोजन,पर्याप्त पानी, कब्ज से बचाव, मसालेदार, तला-भुना भोजन त्याग करें।
**क्षारसूत्र चिकित्सा ही रोग का विकल्प* (फोटो डॉक्टर की)
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ दीपक कुलश्रेष्ठ के अनुसार भगंदर एक जटिल रोग है। लेकिन समय पर सही उपचार से इसे नियंत्रित और ठीक किया जा सकता है। आयुर्वेदिक पद्धति, विशेषकर क्षारसूत्र चिकित्सा, इस रोग में एक प्रभावी विकल्प के रूप में जानी जाती है। रोगी को चाहिए कि स्वयं उपचार न करें और योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लेकर ही इलाज कराएं। यह आलेख जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित कराया गया है। ताकि लोगों के समझ में आ सके की आयुर्वेद चिकित्सा में रोग का निदान छुपा है। रोगियों को सलाह दी जाती है कि किसी भी उपचार से पूर्व विशेषज्ञ की सलाह आवश्य लें, अपने आप उपचार न करें।

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