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आज का पंचांग 3 नवंबर 2026

By Janhit TV

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*आज का पञ्चाङ्ग*
*दिनांक – 03 नवम्बर 2026*
*दिन – मंगलवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत 2083*
*शक संवत -1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – दक्षिणायन*
*ऋतु – शरद ॠतु*
*मास – कार्तिक*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – नवमी सुबह 11:54 तक तत्पश्चात दशमी*
*नक्षत्र – मघा 04 नवंबर रात्रि 03:26 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
*योग – शुक्ल सुबह 09:54 तक तत्पश्चात ब्रह्म*
*राहुकाल – शाम 03:00 से शाम 04:30 तक*
*सूर्योदय – 06:29*
*सूर्यास्त – 05:31*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
*अग्निवास*
24+03+01=28÷4=00 प्रथ्वी लोक में।
*शिववास
24+24+5=53÷7 =04 सभायाम वासे।
व्रत पर्व विवरण –
विशेष- नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
✨ चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)
✨ चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।

*दीपावलीः लक्ष्मीप्राप्ति की साधना*
*08 नवम्बर 2026 रविवार को दीपावली है।*
दीपावली के दिन घर के मुख्य दरवाजे के दायीं और बायीं ओर गेहूँ की छोटी-छोटी ढेरी लगाकर उस पर दो दीपक जला दें। हो सके तो वे रात भर जलते रहें, इससे आपके घर में सुख-सम्पत्ति की वृद्धि होगी।
मिट्टी के कोरे दिये में कभी भी तेल-घी नहीं डालना चाहिए। दिये 6 घंटे पानी में भिगोकर रखें, फिर इस्तेमाल करें। नासमझ लोग कोरे दिये में घी डालकर बिगाड़ करते हैं।
लक्ष्मीप्राप्ति की साधना का एक अत्यंत सरल और केवल तीन दिन का प्रयोगः दीपावली के दिन से तीन दिन तक अर्थात् भाईदूज तक एक स्वच्छ कमरे में अगरबत्ती या धूप (केमिकल वाली नहीं-गोबर से बनी) करके दीपक जलाकर, शरीर पर पीले वस्त्र धारण करके, ललाट पर केसर का तिलक कर, स्फटिक मोतियों से बनी माला द्वारा नित्य प्रातः काल निम्न मंत्र की दो मालायें जपें।
*ॐ नमो भाग्यलक्ष्म्यै च विद् महै।*
*अष्टलक्ष्म्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्।।*
🍃 अशोक के वृक्ष और नीम के पत्ते में रोगप्रतिकारक शक्ति होती है। प्रवेशद्वार के ऊपर नीम, आम, अशोक आदि के पत्ते को तोरण (बंदनवार) बाँधना मंगलकारी है।

*धनतेरस* *06 नवम्बर 2026 शुक्रवार को धनतेरस हैं |*
‘स्कंद पुराण’ में आता है कि धनतेरस को दीपदान करनेवाला अकाल मृत्यु से पार हो जाता है | धनतेरस को बाहर की लक्ष्मी का पूजन धन, सुख-शांति व आंतरिक प्रीति देता है | जो भगवान की प्राप्ति में, नारायण में विश्रांति के काम आये वह धन व्यक्ति को अकाल सुख में, अकाल पुरुष में ले जाता है, फिर वह चाहे रूपये – पैसों का धन हो, चाहे गौ – धन हो, गजधन हो, बुद्धिधन हो या लोक – सम्पर्क धन हो | धनतेरस को दिये जलाओगे …. तुम भले बाहर से थोड़े सुखी हो, तुमसे ज्यादा तो पतंगे भी सुख मनायेंगे लेकिन थोड़ी देर में फड़फड़ाकर जल – तप के मर जायेंगे | अपने – आपमें, परमात्मसुख में तृप्ति पाना, सुख – दुःख में सम रहना, ज्ञान का दिया जलाना – यह वास्तविक धनतेरस, आध्यात्मिक धनतेरस है |
*पंचक*
17 नवम्बर 2026 दिन मंगलवार साय 03:30 बजे से 21 नवम्बर 2026 दिन शनिवार रात्रि 09:54 बजे तक।
*एकादशी*
05 नवम्बर 2026 दिन गुरुवार रामा (रम्भा) एकादशी।
20 नवम्बर 2026 दिन शुक्रवार हरिप्रबोधिनी देव उठानी एकादशी।
*प्रदोष व्रत*
06 नवम्बर 2026 दिन शुक्रवार प्रदोष व्रत धन तेरस।
22 नवम्बर 2026 दिन रविवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
24 नवम्बर 2026 दिन मंगलवार स्नान दान वृत पूर्णिमा।
*अमावस्या*
08 नवम्बर 2026 दिन रविवार पितृ कार्य अमावस्या। (दीपावली)
09 नवम्बर 2026 दिन सोमवार देवकार्य सोमवती अमावस्या।
*पंo वेदान्त अवस्थी

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