*आज का पञ्चाङ्ग*
*दिनांक – 30 अप्रैल 2026*
*दिन – गुरूवार*
*संवत्सर – रौद्र*
*विक्रम संवत 2083*
*शक संवत -1948*
*कलि युगाब्द – 5128*
*अयन – उत्तरायण*
*ऋतु – बसंत ॠतु*
*मास – वैशाख*
*पक्ष – शुक्ल*
*तिथि – चतुर्दशी रात्रि 09:12 तक तत्पश्चात पूर्णिमा*
*नक्षत्र – चित्रा 01 मई रात्रि 02:16 तक तत्पश्चात स्वाती*
*योग – वज्र रात्रि 08:55 तक तत्पश्चात सिद्धि*
*राहुकाल – दोपहर 01:30 से शाम 03:00 तक*
*सूर्योदय – 05:38*
*सूर्यास्त – 06:22*
स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।
*दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे*
*अग्निवास*
14+05+01=20÷4=02 पाताल लोक में।
*शिववास*
14+14+5=33÷7 =05 भोजन चैव वासे।
व्रत पर्व विवरण-
विशेष – चतुर्दशी व पूर्णिमा एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
*व्यतिपात योग*
*01 मई 2026 शुक्रवार को रात्रि 09:13 से 02 मई, शनिवार को रात्रि 09:45 तक व्यतिपात योग है।*
व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।
वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।
*सुख – सम्पदा और श्रेय की प्राप्ति – वैशाखी पूर्णिमा*
*01 मई 2026 शुक्रवार को वैशाखी पूर्णिमा है ।*
वैशाखी पूर्णिमा को ‘धर्मराज व्रत’ कहा गया है | यह पूर्णिमा दान-धर्मादि के अनेक कार्य करने के लिए बड़ी ही पवित्र तिथि है | इस दिन गरीबों में अन्न, वस्त्र, टोपियाँ, जूते-चप्पल, छाते, छाछ या शर्बत , सत्संग के सत्साहित्य आदि का वितरण करना चाहिए | अपने स्नेहियों, मित्रों को सत्साहित्य, सत्संग की वीसीडी, डीवीडी, मेमोरी कार्ड आदि भेंट में दे सकते हैं |
इस दिन यदि तिलमिश्रित जल से स्नान कर घी, शर्करा और तिल से भरा हुआ पात्र भगवान विष्णु को निवेदन करें और उन्हीं से अग्नि में आहुति दें अथवा तिल और शहद का दान करें, तिल के तेल के दीपक जलाये, जल और तिल से तर्पण करें अथवा गंगादि में स्नान करें तो सब पापों से निवृत्त हो जाते हैं | यदि उस दिन एक समय भोजन करके पूर्ण-व्रत करें तो सब प्रकार की सुख-सम्पदाएँ और श्रेय की प्राप्ति होती है |
*वैशाखी पूनम*
वैशाख मास की पूर्णिमा की कितनी महिमा है !! इस पूर्णिमा को जो गंगा में स्नान करता है , भगवत गीता और विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करता है उसको जो पुण्य होता है उसका वर्णन इस भूलोक और स्वर्गलोक में कोई नहीं कर सकता उतना पुण्य होता है | ये बात स्कन्द पुराण में लिखी हुई है | अगर कोई विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ न कर सके तो गुरु मंत्र की १० माला जादा कर ले अपने नियम से |
*पूर्णिमा*
01 मई 2026 दिन शुक्रवार स्नान दान वृत पूर्णिमा।
*पंo वेदान्त अवस्थी*



