~ *आज का पञ्चाङ्ग*~
*दिनांक – 02 मार्च 2026*
*दिन – सोमवार*
*संवत्सर – सिद्धार्थ*
*शक संवत – 1947*
*विक्रम संवत् – 2082*
*कलि युगाब्द – 5127*
*अयन – उत्तरायण*
*ऋतु – शिशिर*
*मास – फाल्गुन*
*पक्ष – शुक्ल*
*तिथि – चतुर्दशी शाम 05:55 तक तत्पश्चात् पूर्णिमा*
*नक्षत्र – अश्लेशा प्रातः 07:51 तक तत्पश्चात् मघा*
*योग – अतिगण्ड दोपहर 12:19 तक तत्पश्चात् सुकर्मा*
*राहुकाल – सुबह 07:30 से सुबह 09: 00तक*
*सूर्योदय – 06:18*
*सूर्यास्त – 05:42*
दिशा शूल – पूर्व दिशा में
*अग्निवास*
14+02+01=17÷4=01 स्वर्ग लोक में।
*शिववास*
14+14+5=33÷7 =05 भोजन चैव वासे।
व्रत पर्व विवरण – हुताशनी पूर्णिमा, होलिका दहन
विशेष – चतुर्दशी, पूर्णिमा और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
*गृहस्थ ब्रह्मचर्य*
श्री मनु महाराज ने गृहस्थाश्रम में ब्रह्मचर्य की व्याख्या इस प्रकार की हैः
अपनी धर्मपत्नी के साथ केवल ऋतुकाल में समागम करना, इसे गार्हस्थ्य ब्रह्मचर्य कहते हैं ।
रजोदर्शन के प्रथम दिन से सोलहवें दिन तक ऋतुकाल माना जाता है । इसमें मासिक धर्म की चार रात्रियाँ तथा ग्यारहवीं व तेरहवीं रात्रि निषिद्ध है । शेष दस रात्रियों से दो सुयोग्य रात्रियों में स्वस्त्री-गमन करने वाला व्यक्ति गृहस्थ ब्रह्मचारी है ।
इस प्रकार आहार, निद्रा व ब्रह्मचर्य का युक्तिपूर्वक सेवन व्यक्ति को स्वस्थ, सुखी व सम्मानित जीवन की प्राप्ति में सहायक होता है ।
*प्रदोष व्रत*
01 मार्च 2026 दिन रविवार प्रदोष व्रत।
*पूर्णिमा*
02 मार्च 2026 दिन सोमवार व्रत पूर्णिमा होलिका दहन।
03 मार्च 2026 चन्द्र ग्रहण।
*पंo वेदान्त अवस्थी*


