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खाद तो दिया नहीं.. लाठी चार्ज करा दो ? अब पुलिस के डंडे से किसानों की जरूरत को दबाने में जुटी सरकार

By Janhit TV

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*खाद तो दिया नहीं ,,,,लाठी चार्ज ही करा दो,,,, अब पुलिस के डंडे से किसानों की जरूरत को दबाने में जुटीं सरकार*_________________
*मदिरा का टेंडर कर खुलें बाजार में बेचने वाली सरकारें किसानों की खाद के लिए हुईं वे जुबान,,*_____________ (वरिष्ठ पत्रकार राज नारायण मिश्रा रीवा)
रीवा ___जिले में ( अषाढ़- सावन)जुलाई माह,, अगस्त माह किसानों के लिए खरीफ फसल की बोनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है प्रकृति की भी यही व्यवस्था है की अषाढ़, सावन में बारिश होती है किसानों को खाद बीज की भरपूर जरूरत होती है,, हर सरकार को पता है प्रशासन को पता रहता है कि खाद,बीज की आवश्यकता होगी इसलिए पहले से निर्माण कंपनी से डिमांड करना चाहिए लेकिन वर्तमान दशा एवं सरकारी नीतियों को देखते हुए ऐसा आभास हो गया है कि भारत भले ही कृषि प्रधान देश कहां जाता रहा है अब यह देश कृषि प्रधान नहीं रहेगा, जिस,देश-राज्य की सरकारें किसानों के प्रति असंवेदनशीलता का रवैया अपनाया है वहां किसानों की खाद बीज न मिलना, घोर निराशापूर्ण निर्णय है तीन से चार दिन तक समितियों के सामने भूखे,,प्यासे किसान एक बोरी खाद के लिए खुले आसमान तले पड़े हुए हैं उन्हें पुलिस की लाठी से हांकने का कठोर कदम उठाया है जो निंदा की परिधि को भी लांघ रहे हैं,, खाद आ रही है लेकिन किसानों को मिल नहीं रही है या प्रशासन इस मामले में गंभीरता से नहीं बिचार कर रहा है यह देखा जाता है,, मध्यप्रदेश में हर गांव से लेकर राजधानी तक खाद की किल्लत मची हुई है परन्तु सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता है,, किसानों की जरूरत या समस्या से,,, रीवा जिले में जगह, जगह किसान डेरा डाले हुए वितरण केन्द्रों का बंद दरवाज़ा देखते हुए दिन व्यतीत कर रहे हैं लेकिन न ताला खुलते न खाद मिल रही है,,अब तो पुलिस की लाठियां बरसाई जा रही है,, पुलिस भी कितनी ना इंसाफी करतीं जो असहाय किसानों पर लाठियां भांजकर पीटते हैं जबकि किसानों के घर से खुद भी जुड़ कर पुलिस बनें है,,,,_________________ जो कभी खेती किया नहीं वह भी देते हैं ज्ञान खाद को बनाते हैं राजनीतिक मुद्दा,,__ कुछ ऐसे लोगों द्वारा बयान जारी किया जाता है कि खाद पर्याप्त है इसे विरोधी मुद्दा बना रहे,,, ऐसे लोग कभी अपने घर पर धनिया की भी खेती नहीं किया फिर भी राज़ पर नीति करते हैं

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